इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध से बढ़ा तनाव, तेल महंगा; भारत में गैस सिलेंडर भी हुआ महंगा

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Javed Haider Zaidi

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इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध, तेल की कीमतों में उछाल और भारत में एलपीजी सिलेंडर महंगा हुआ।

मिडिल ईस्ट में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है। शुरुआत में माना जा रहा था कि यह संघर्ष कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

हमले के बाद बढ़ा संघर्ष

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई केशहीद होने की खबर सामने आई है। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

इजरायली सेना और खुफिया एजेंसी मोसाद ईरान के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। वहीं ईरान भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दे रहा है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है।

ट्रंप का सख्त बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि अगर कोई समझौता होगा तो ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद कर सकता है।

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तेल की कीमतों में उछाल

इस युद्ध का असर दुनिया भर में तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। मिडिल ईस्ट के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है।

तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत का करीब 50 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से आता है, इसलिए इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

रूसी तेल खरीद पर भारत का जवाब

अमेरिका की ओर से कहा गया कि युद्ध के कारण भारत रूस से 30 दिन तक कच्चा तेल खरीद सकता है। इस पर भारत सरकार ने साफ कहा कि देश अपनी जरूरत के अनुसार तेल खरीदता है और इसके लिए किसी देश की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

सरकार ने बताया कि भारत फरवरी 2026 में भी रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा और रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा।

रसोई गैस भी महंगी

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का असर भारत में घरेलू गैस की कीमतों पर भी दिखने लगा है।

सरकारी तेल कंपनी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 114.5 रुपये महंगा हो गया है।

अब दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा, जो पहले 853 रुपये था।

आगे क्या हो सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो दुनिया भर में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर भी पड़ेगा।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और दुनिया इस युद्ध के अगले कदम पर नजर रखे हुए है।

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इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी: खाड़ी देशों पर मंडराया विकिरण का खतरा

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ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि उसके महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्र पर बार-बार हमले किए जा रहे हैं, जिसके गंभीर परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर अब तक चार बार हमला किया है। उनका कहना है कि यदि इन हमलों के कारण रेडियोएक्टिव फॉलआउट (विकिरण का प्रसार) होता है, तो इसका असर ईरान की राजधानी तेहरान से ज्यादा खाड़ी देशों पर पड़ेगा।

खाड़ी देशों के लिए बड़ी चेतावनी

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि संभावित विकिरण का असर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों की राजधानियों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में वहां “जीवन पूरी तरह समाप्त हो सकता है”, जो पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ईरान का दावा: अमेरिका को हुआ नुकसान

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के दो फाइटर जेट, एक A-10 एयरक्राफ्ट, कई हेलीकॉप्टर, दो MQ-9 ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

पश्चिमी देशों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति पर पश्चिमी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमलों को लेकर वही संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु संयंत्रों पर हमले न केवल सैन्य बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद खतरनाक होते हैं। यदि विकिरण फैलता है, तो इसका असर सीमाओं से परे जाकर लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

ईरान ने कहा है कि उस पर यह युद्ध थोपा गया है और वह इसका “स्थायी और सशर्त समाधान” चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्थायी युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

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