नतान्ज़ के जवाब में ईरान का पलटवार: डिमोना न्यूक्लियर साइट और अराद पर मिसाइल हमले, कई घायल

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Javed Haider Zaidi

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डिमोना शहर में मिसाइल हमले के बाद क्षतिग्रस्त इमारतें, टूटी खिड़कियां और मौके पर राहत-बचाव कार्य में जुटी टीमें

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अपने नतान्ज़ परमाणु संयंत्र पर हुए कथित हमले के जवाब में इजरायल के दक्षिणी हिस्सों पर बड़ा मिसाइल हमला किया है। इस हमले में डिमोना और अराद जैसे अहम शहर निशाने पर रहे, जहां कई लोग घायल हुए हैं और भारी नुकसान की खबर सामने आई है।

ईरान की इस कार्रवाई को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने नतान्ज़ हमले का सीधा प्रतिशोध बताया है। शनिवार को दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक डिमोना शहर में आकर गिरी, जहां इजरायल का बेहद संवेदनशील शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है।

इजरायली सेना (IDF) के अनुसार, डिमोना में एक इमारत पर सीधा मिसाइल हमला हुआ, जिससे आसपास के इलाके में भारी तबाही मची। कई इमारतों के शीशे टूट गए और संरचनात्मक नुकसान हुआ। इस हमले में कम से कम 47 लोग घायल हुए हैं, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हमले की भयावहता साफ देखी जा सकती है। एक मिसाइल इमारत से टकराते ही जोरदार धमाका होता है, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच जाती है। हालांकि, वीडियो की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है।

डिमोना शहर, जिसे “लिटिल इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां स्थित परमाणु अनुसंधान केंद्र को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं, हालांकि इजरायल अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं करता।

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हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि डिमोना में मिसाइल गिरने की जानकारी मिली है, लेकिन फिलहाल परमाणु सुविधा को नुकसान पहुंचने के संकेत नहीं हैं। एजेंसी ने दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है।

उधर, इजरायली सेना इस बात की जांच कर रही है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली इस मिसाइल को रोकने में क्यों विफल रही। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इंटरसेप्टर मिसाइलें लक्ष्य को भेदने में सफल नहीं हो सकीं, जिसके चलते यह हमला हुआ।

इसी के साथ ईरान ने अराद शहर को भी निशाना बनाया, जहां कई आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यहां से कम से कम 75 लोगों को घायल अवस्था में निकाला गया है। घायलों में 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि अन्य को मामूली और मध्यम चोटें आई हैं। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले ईरान के नतान्ज़ परमाणु संयंत्र पर भी हमला हुआ था, जिसे देश का प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र माना जाता है। ईरान ने दावा किया था कि हमले में कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ, लेकिन इसे अपनी संप्रभुता पर बड़ा हमला बताया था।

मध्य पूर्व में बढ़ते इस सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी: खाड़ी देशों पर मंडराया विकिरण का खतरा

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ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि उसके महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्र पर बार-बार हमले किए जा रहे हैं, जिसके गंभीर परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर अब तक चार बार हमला किया है। उनका कहना है कि यदि इन हमलों के कारण रेडियोएक्टिव फॉलआउट (विकिरण का प्रसार) होता है, तो इसका असर ईरान की राजधानी तेहरान से ज्यादा खाड़ी देशों पर पड़ेगा।

खाड़ी देशों के लिए बड़ी चेतावनी

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि संभावित विकिरण का असर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों की राजधानियों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में वहां “जीवन पूरी तरह समाप्त हो सकता है”, जो पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ईरान का दावा: अमेरिका को हुआ नुकसान

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के दो फाइटर जेट, एक A-10 एयरक्राफ्ट, कई हेलीकॉप्टर, दो MQ-9 ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

पश्चिमी देशों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति पर पश्चिमी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमलों को लेकर वही संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु संयंत्रों पर हमले न केवल सैन्य बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद खतरनाक होते हैं। यदि विकिरण फैलता है, तो इसका असर सीमाओं से परे जाकर लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

ईरान ने कहा है कि उस पर यह युद्ध थोपा गया है और वह इसका “स्थायी और सशर्त समाधान” चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्थायी युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

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