होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब पर ईरान की नजर, दो बड़े समुद्री रास्ते बंद हुए तो दुनिया में मचेगा तेल संकट

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

ईरान की रणनीति से होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर संकट, वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मिसाइल हमलों और हवाई टकराव के बाद यह संघर्ष धीरे-धीरे समुद्री मोर्चे पर शिफ्ट होता नजर आ रहा है। पहले से ही दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर संकट बना हुआ है, वहीं अब ईरान ने संकेत दिया है कि वह एक और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते Bab al‑Mandeb Strait को भी निशाने पर ले सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन दोनों मार्गों पर एक साथ संकट गहराता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है।

समुद्र की ओर बढ़ रहा युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव में शुरुआती दौर में मिसाइल और हवाई हमलों का इस्तेमाल ज्यादा हुआ। लेकिन अब रणनीति बदलती नजर आ रही है। ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अगर अमेरिका की ओर से कोई “रणनीतिक गलती” होती है, तो ईरान अपने समुद्री अभियान को एक और अहम जलमार्ग की ओर मोड़ सकता है।

एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में संकेत दिया कि दूसरा बड़ा समुद्री रास्ता भी होर्मुज जैसी स्थिति का सामना कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और कई अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियां पहले ही सावधानी बरतने लगी हैं।

बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण

दुनिया के ऊर्जा व्यापार में बाब-अल-मंदेब की भूमिका बेहद अहम है। यह जलडमरूमध्य Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और इसी रास्ते से जहाज Suez Canal के जरिए यूरोप तक पहुंचते हैं।

Also Read

आंकड़ों के अनुसार, हूती हमलों से पहले इस मार्ग से रोजाना लगभग 59 से 75 जहाज गुजरते थे। इनमें करीब 8.7 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन परिवहन किया जाता था। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी और अन्य ऊर्जा संसाधन भी इसी रास्ते से यूरोप और अन्य बाजारों तक पहुंचते थे।

अगर यह मार्ग बाधित होता है तो फारस की खाड़ी से यूरोप जाने वाला सबसे छोटा समुद्री रास्ता लगभग खत्म हो जाएगा।

जहाजों को बदलना पड़ेगा लंबा रास्ता

अगर बाब-अल-मंदेब बंद हो जाता है तो जहाजों को अफ्रीका के Cape of Good Hope के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा। इससे हर यात्रा में लगभग दो सप्ताह का अतिरिक्त समय लग सकता है।

इतना ही नहीं, जहाजों को ईंधन पर भी भारी अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक एक यात्रा में करीब 10 लाख डॉलर तक का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। इससे तेल और गैस की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा और वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

हूती विद्रोही बन सकते हैं बड़ा फैक्टर

बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में ईरान का प्रभाव काफी हद तक यमन के Houthi Movement के साथ उसके संबंधों पर निर्भर करता है। हूती विद्रोही इस इलाके के पास के कई क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते हैं और पहले भी जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता दिखा चुके हैं।

नवंबर 2023 से रेड सी मार्ग में हूतियों ने 100 से अधिक हमले किए हैं, जिससे 60 से ज्यादा देशों के जहाज प्रभावित हुए। इन हमलों के कारण 2024 के अंत तक बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले तेल का प्रवाह 50 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया था और एलएनजी टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।

अगर दोनों रास्ते बंद हुए तो क्या होगा

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb Strait दोनों ही लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात लगभग रुक सकता है। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद गंभीर होगी।

दुनिया की तेल आपूर्ति को संतुलित रखने में OPEC+ की अहम भूमिका है और इसकी लगभग 70 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पादन क्षमता खाड़ी क्षेत्र में ही मौजूद है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो दुनिया के पास इसकी भरपाई करने के विकल्प बेहद सीमित रह जाएंगे।

यूरोप पर पड़ सकता है सबसे बड़ा असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो इसका सबसे ज्यादा असर यूरोप की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि यूरोप अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर समुद्री आयात पर निर्भर है।

अगर जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा और आपूर्ति कम हो गई, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव ने साफ संकेत दे दिया है कि समुद्री व्यापार मार्ग अब आधुनिक युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।

Next Post

फारस की खाड़ी में कतर का सैन्य हेलीकॉप्टर क्रैश, 6 की मौत; युद्ध के बीच हादसे ने बढ़ाई चिंता

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

फारस की खाड़ी में क्रैश हुआ कतर का सैन्य हेलीकॉप्टर, बचाव टीमें तलाश अभियान में जुटी

मध्य पूर्व में जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक बड़ी घटना सामने आई है। कतर का एक सैन्य हेलीकॉप्टर रविवार को फारस की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 6 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। हादसे के बाद से एक व्यक्ति अब भी लापता है, जिसकी तलाश जारी है।

कतर के आंतरिक मंत्रालय के मुताबिक यह दुर्घटना देश के क्षेत्रीय जल में हुई। बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है, जिसमें कोस्ट गार्ड और आंतरिक सुरक्षा बल की टीमें शामिल हैं। हालांकि अब तक मृतकों की पहचान और उनकी राष्ट्रीयता को लेकर आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।

रक्षा मंत्रालय ने इस हादसे के पीछे प्रारंभिक कारण “तकनीकी खराबी” बताया है। जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर नियमित ड्यूटी पर था और उसी दौरान अचानक नियंत्रण खो बैठा, जिसके बाद वह समुद्र में गिर गया। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और हमलों के बीच इस हादसे ने सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

हालांकि कतर सरकार ने साफ किया है कि इस हेलीकॉप्टर क्रैश में किसी भी तरह की दुश्मन कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे एक तकनीकी दुर्घटना ही माना जा रहा है।

बीते दिनों खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई थीं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में इस दुर्घटना को लेकर शुरुआती स्तर पर कई तरह की आशंकाएं जताई गईं, लेकिन कतर ने उन्हें खारिज कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह एक तकनीकी हादसा हो, लेकिन मौजूदा हालात में इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, ऐसे में किसी भी प्रकार की असामान्य घटना का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल कतर सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की अपील की है। बचाव दल लापता व्यक्ति की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं।

Next Post

Loading more posts...