देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। अचानक आए इन झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र हरियाणा के रेवाड़ी जिले में था। यह भूकंप सुबह करीब 7 बजकर 1 मिनट पर आया। भूगर्भीय आंकड़ों के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 मापी गई, जिसे सामान्य तौर पर हल्के झटकों की श्रेणी में रखा जाता है।
झटके महसूस होते ही कई इलाकों में लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। कुछ सेकंड तक जमीन में हल्की कंपन महसूस हुई, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। फिलहाल कहीं से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
क्यों आते हैं भूकंप?
भूकंप धरती के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की सतह कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी हुई है। ये प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं और जब इन प्लेट्स के बीच टकराव, दबाव या घर्षण होता है तो धरती के अंदर जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है। इसी प्रक्रिया के कारण भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
हाल के वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। कई बार इन झटकों की तीव्रता अधिक होने पर भारी तबाही भी हो सकती है। बड़े भूकंप की स्थिति में इमारतों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
भारत में भूकंप के जोन
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार भारत का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इसी आधार पर देश को चार भूकंपीय जोन में बांटा गया है—जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5।
इनमें जोन-5 को सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जबकि जोन-2 अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला क्षेत्र है। देश की राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जिसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। इस जोन में कभी-कभी 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप आने की भी संभावना रहती है।
भारत में हिमालय क्षेत्र, कच्छ क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत भूकंप की दृष्टि से ज्यादा सक्रिय माने जाते हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे इन क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां ज्यादा देखी जाती हैं।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का असर
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है। यह स्केल भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा के आधार पर उसकी ताकत को दर्शाता है।
रिक्टर स्केल पर 4 से 4.9 तीव्रता वाले भूकंप में घरों के अंदर रखा सामान हिल सकता है या गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी फर्नीचर भी हिलने लगता है। 6 से 6.9 तीव्रता वाले भूकंप में इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी नींव में दरारें आ सकती हैं।
अगर तीव्रता 7 से 7.9 के बीच होती है तो इमारतें गिरने लगती हैं और बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। वहीं 8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप समुद्र में सुनामी का खतरा पैदा कर सकते हैं। 9 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप को सबसे विनाशकारी माना जाता है, जिनसे बड़े स्तर पर जनहानि और तबाही हो सकती है।
हालांकि दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह आया भूकंप बेहद हल्की श्रेणी का था, इसलिए इससे किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और आपदा प्रबंधन से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।