मिडिल ईस्ट में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है। शुरुआत में माना जा रहा था कि यह संघर्ष कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
हमले के बाद बढ़ा संघर्ष
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई केशहीद होने की खबर सामने आई है। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
इजरायली सेना और खुफिया एजेंसी मोसाद ईरान के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। वहीं ईरान भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दे रहा है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है।
ट्रंप का सख्त बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि अगर कोई समझौता होगा तो ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद कर सकता है।
तेल की कीमतों में उछाल
इस युद्ध का असर दुनिया भर में तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। मिडिल ईस्ट के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है।
तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत का करीब 50 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से आता है, इसलिए इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
रूसी तेल खरीद पर भारत का जवाब
अमेरिका की ओर से कहा गया कि युद्ध के कारण भारत रूस से 30 दिन तक कच्चा तेल खरीद सकता है। इस पर भारत सरकार ने साफ कहा कि देश अपनी जरूरत के अनुसार तेल खरीदता है और इसके लिए किसी देश की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
सरकार ने बताया कि भारत फरवरी 2026 में भी रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा और रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा।
रसोई गैस भी महंगी
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का असर भारत में घरेलू गैस की कीमतों पर भी दिखने लगा है।
सरकारी तेल कंपनी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 114.5 रुपये महंगा हो गया है।
अब दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा, जो पहले 853 रुपये था।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो दुनिया भर में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर भी पड़ेगा।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और दुनिया इस युद्ध के अगले कदम पर नजर रखे हुए है।