कानपुर | यूपी के कानपुर शहर में एक बार फिर थाने के पास हुई हिंसक वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। घटना कानपुर साउथ के जूही थाना क्षेत्र में हुई, जहां थाने से कुछ कदम की दूरी पर मां-बेटी समेत चार महिलाओं पर एक ऑटो चालक और उसके साथियों ने ब्लेड से ताबड़तोड़ हमला किया। इस हमले में दो महिलाओं के चेहरे और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं, जिन्हें डॉक्टरों ने मिलाकर कुल 35 टांके लगाने पड़े।
रैश ड्राइविंग पर विरोध से भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार, किदवईनगर एन-ब्लॉक निवासी रानी अपनी बेटी पलक, बड़ी बहन राधा, छोटी बहन प्रीति और प्रीति के पति गौरव के साथ बाजार जा रही थीं। जैसे ही वे जूही थाना के पास मुख्य सड़क पर पहुंचीं, सामने से एक तेज रफ्तार ऑटो अनियंत्रित होकर आया और पलट गया। इस लापरवाही पर महिलाओं ने विरोध जताया, जिससे विवाद बढ़ गया और मामला हाथापाई तक पहुंचा।
ब्लेड से किए गए बेरहमी वाले वार
आरोप है कि ऑटो चालक आदिल नशे की हालत में था और उसके साथ दिशांत व बाबू उर्फ मोहम्मद समीर भी मौजूद थे। महिलाओं ने जब अपने परिजनों को बचाने की कोशिश की, तो तीनों आरोपियों ने उनके चेहरे, गर्दन और शरीर पर ब्लेड से बेरहमी से वार किए। हमला इतना भीषण था कि रानी के गाल पर गहरा घाव आया, जिसमें 25 टांके लगे। दूसरी महिला की गर्दन पर गंभीर चोट आई, जिसमें 10 टांके लगे। बेटी पलक और प्रीति भी गंभीर रूप से घायल हुईं।
पुलिस का विवादित रवैया
सबसे चौंकाने वाली बात पुलिस का रवैया रही। घायल महिलाएं जूही थाने गईं, लेकिन पुलिस ने सीमा विवाद का हवाला देते हुए तुरंत कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। पुलिस का दावा था कि यह घटना किदवईनगर थाना क्षेत्र में हुई है, इसलिए जूही थाना कार्रवाई नहीं कर सकता। पीड़ित महिलाओं को लगभग एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा, इस दौरान आरोपी फरार हो गए। बाद में यूपी-112 की टीम पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
ब्लेड मार गिरोह से कनेक्शन की जांच
पीड़िता रानी की तहरीर पर किदवईनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया और मुख्य आरोपी आदिल को गिरफ्तार कर लिया। अन्य दो आरोपियों दिशांत और बाबू की तलाश जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या ये युवक किसी संगठित ‘ब्लेड मार गिरोह’ से जुड़े हैं, जो शहर में महिलाओं को निशाना बनाकर हमले करते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न
यह घटना कानपुर की महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। थाने के सामने ही ऐसा हमला होना पुलिस की मुस्तैदी और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अपराधी अब बेखौफ हो गए हैं और कानून का डर खत्म हो गया है।