पार्टी और परिवार से निष्कासन के बाद पहली मुलाकात: लालू यादव से मिले तेज प्रताप, बातचीत को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

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Javed Haider Zaidi

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दिल्ली में मीसा भारती के आवास पर लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करते तेज प्रताप यादव, पार्टी और परिवार से निष्कासन के बाद पहली बार आमने-सामने आए दोनों नेता।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और परिवार से अलग किए जाने के बाद Tej Pratap Yadav (तेज प्रताप यादव) ने पहली बार अपने पिता और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की है। यह मुलाकात शुक्रवार, 9 जनवरी 2026, को दिल्ली में हुई, जिसे लेकर राजनीतिक और पारिवारिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दरअसल, शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (CBI स्पेशल कोर्ट) में बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले की सुनवाई थी। इस दौरान लालू परिवार के कई सदस्य कोर्ट में मौजूद रहे, जिनमें तेजस्वी यादव भी शामिल थे। कोर्ट परिसर में तेज प्रताप यादव का तेजस्वी से आमना-सामना तो हुआ, लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

मीसा भारती के आवास पर हुई मुलाकात

कोर्ट की कार्यवाही के बाद तेज प्रताप यादव, दिल्ली स्थित अपनी बहन मीसा भारती के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। पार्टी और परिवार से निष्कासन के बाद यह दोनों की पहली आमने-सामने की मुलाकात मानी जा रही है।

मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने कहा,

“पिता जी से मुलाकात हुई। उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना। अभी उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही है। मैंने उन्हें मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का निमंत्रण दिया है।”

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जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या लालू यादव उस भोज में आएंगे, तो तेज प्रताप ने मुस्कुराते हुए कहा,

“काहे नहीं आएंगे?”

‘हम लड़ाई लड़ेंगे’ – तेज प्रताप यादव

इधर, लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा,

“हम लड़ाई लड़ेंगे।”

पृष्ठभूमि: निष्कासन से नई सियासी राह तक

गौरतलब है कि अनुष्का यादव प्रकरण के बाद लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था और पारिवारिक संबंध भी सार्वजनिक रूप से समाप्त कर दिए थे। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी जनशक्ति जनता दल का गठन किया।

उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से किस्मत आजमाई, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज, सबकी निगाहें लालू यादव पर

अब तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज आयोजित करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने एनडीए के कई नेताओं को भी न्योता भेजा है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस भोज में लालू प्रसाद यादव शामिल होंगे या नहीं।

यह मुलाकात सिर्फ एक पारिवारिक संवाद थी या किसी बड़े राजनीतिक संकेत की शुरुआत—इस पर आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ हो सकती है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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