पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सुरेश कालमाड़ी का निधन, पुणे में अंतिम सांस

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे Suresh Kalmadi (सुरेश कलमाड़ी) का 6 जनवरी 2026 को पुणे में निधन हो गया। 1944 में पुणे में जन्मे कालमाड़ी ने अपने जीवन में राजनीति, खेल और समाज सेवा के क्षेत्र में कई अहम योगदान दिए। उनका निधन न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजनीतिक और खेल प्रशासन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

सुरेश कालमाड़ी का जन्म 15 मई 1944 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजनीति से की और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय सदस्य के रूप में कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाईं। वे लंबे समय तक पुणे लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

राजनीतिक जीवन और उपलब्धियाँ

कालमाड़ी ने अपने राजनीतिक जीवन में महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल में खेल और सामाजिक विकास के कई कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों के कारण युवाओं में खेल और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी।

वे राजनीति में अपनी स्पष्ट सोच और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते थे। उनके समर्थक उन्हें समर्पित और मेहनती नेता के रूप में याद करते हैं।

खेल प्रशासन में योगदान

सुरेश कालमाड़ी का नाम भारतीय खेल प्रशासन के क्षेत्र में भी काफी जाना जाता है। उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में काम किया और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भाग लिया।

Also Read

उनकी सबसे चर्चित भूमिका 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में रही। इस आयोजन के दौरान उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए, लेकिन खेल और प्रशासन के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।

सामाजिक योगदान

कालमाड़ी का योगदान केवल राजनीति और खेल तक सीमित नहीं था। उन्होंने पुणे और महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी इलाकों में शिक्षा, खेल और सामाजिक सुधार कार्यक्रमों की दिशा में कई पहल की। उनका प्रयास हमेशा यह रहा कि खेल और शिक्षा का विकास आम जनता तक पहुंचे और युवाओं में खेल के प्रति जागरूकता बढ़े।

निधन और अंतिम संस्कार

सुरेश कालमाड़ी का निधन 6 जनवरी 2026 को पुणे में हुआ। उनके परिवार, समर्थक और राजनीतिक क्षेत्र के कई नामी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कालमाड़ी की लंबी राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा ने महाराष्ट्र और भारत की राजनीति और खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण छाप छोड़ी है।

विशेष टिप्पणी

सुरेश कालमाड़ी का व्यक्तित्व जटिल था लेकिन प्रेरणादायक भी। उन्होंने खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में कई उतार-चढ़ाव देखे। उनके समर्थक उन्हें समर्पित नेता और खेल प्रेमी के रूप में याद करते हैं। उनकी मृत्यु से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजनीतिक और खेल प्रशासन समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।

Next Post

जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

Next Post

Loading more posts...