Sultanpur रेलवे स्टेशन पर यात्री की अचानक मृत्यु, प्लेटफार्म-3 पर मिला शव

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Javed Haider Zaidi

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सुलतानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर यात्रियों के बीच अचानक मृत पाए गए रमेश चंद्र मिश्र का दृश्य, घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और लोग।

Sultanpur: आज सुबह सुलतानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर एक यात्रि का शव मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार यह व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना रेलवे स्टेशन की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है।

घटना का विवरण

मृतक की पहचान रमेश चंद्र मिश्र (55) के रूप में हुई, जो पयागीपुर के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि वह लखनऊ के लिए ट्रेन पकड़ने स्टेशन पहुंचे थे। रमेश मिश्र नियमित डायलिसिस के लिए लखनऊ जा रहे थे। स्टेशन पर वह बेंच पर बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे गिर पड़े। चिकित्सक जब तक पहुंचे, तब तक उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार का बयान

स्थानीय लोगों ने बताया कि रमेश मिश्र का अचानक गिरना और बेहोश होना यात्रियों के लिए चौंकाने वाला था। कई यात्रियों ने तुरंत सहायता देने की कोशिश की।

मृतक की पत्नी सुनीता मिश्रा ने बताया कि उनके पति लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और आज लखनऊ इलाज के लिए जा रहे थे। उनका कहना है कि वे उम्मीद कर रहे थे कि समय पर इलाज मिल जाएगा, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।

पुलिस की प्रतिक्रिया

सुलतानपुर जीआरपी के अधिकारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मृत्यु के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही चलेगा। अधिकारी ने कहा कि फिलहाल प्रथम दृष्टया यह स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुई मृत्यु प्रतीत होती है, लेकिन जांच पूरी होने तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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पुलिस दोनों पक्षों से बयान ले रही है और यात्रियों से भी पूछताछ कर रही है।

स्टेशन पर माहौल और सुरक्षा

घटना के बाद प्लेटफार्म पर मौजूद यात्रियों और कर्मचारियों में शोक और चिंता का माहौल बना। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से आग्रह किया है कि ऐसी आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता और बेहतर सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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