Silver Prices: चांदी ने रचा नया इतिहास, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा भाव; 2026 में अब तक 15% की छलांग

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें ऑल-टाइम हाई पर, सिल्वर बार और ग्लोबल मार्केट ट्रेंड

Silver Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना दिया है। 7 जनवरी को चांदी का भाव 83.62 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का ऑल-टाइम हाई है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी की कीमतों में करीब 15% की तेजी दर्ज की जा चुकी है, जिससे निवेशकों और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

सप्लाई संकट और मजबूत मांग ने दी तेजी को धार

ब्रोकरेज फर्मों और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, चांदी की इस तेज रफ्तार के पीछे कई मजबूत वजहें हैं। लगातार सप्लाई की कमी, इंडस्ट्रियल डिमांड में मजबूती और अनुकूल ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक माहौल ने कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचाया है।

एक्सिस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि इस समय चांदी को दोहरी मजबूती मिल रही है—एक तरफ इंडस्ट्रियल कंजम्प्शन और दूसरी ओर ETF के जरिए आ रहा निवेश। सोलर पावर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर्स में बढ़ती मांग ने चांदी को निवेशकों के फोकस में बनाए रखा है।

भारत में सोलर सेक्टर से बढ़ी घरेलू खपत

भारत में भी चांदी की मांग को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। सोलर एनर्जी क्षमता बढ़ाने की सरकारी योजनाओं के चलते सोलर पैनल निर्माण में चांदी के बढ़ते इस्तेमाल से घरेलू खपत में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एनर्जी ट्रांजिशन के साथ चांदी की इंडस्ट्रियल उपयोगिता और बढ़ेगी।

लगातार पांचवें साल घाटे में ग्लोबल सिल्वर मार्केट

Silver Institute के आंकड़ों के अनुसार, ग्लोबल सिल्वर मार्केट लगातार पांचवें साल स्ट्रक्चरल डेफिसिट में बना हुआ है। यानी मांग, सप्लाई से लगातार ज्यादा बनी हुई है।
करीब 70% चांदी का उत्पादन अन्य धातुओं के बाय-प्रोडक्ट के रूप में होता है, जिससे कीमतें बढ़ने के बावजूद उत्पादन को तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। घटते अयस्क ग्रेड, सीमित रीसाइक्लिंग और सपाट माइन आउटपुट ने उपलब्धता को और सीमित कर दिया है। लंदन, चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में चांदी का स्टॉक मल्टी-ईयर लो के आसपास बताया जा रहा है।

Also Read

नीतिगत जोखिम और सप्लाई पर दबाव

इनक्रीड मनी और एक्सिस सिक्योरिटीज की रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की ओर से चांदी के निर्यात पर सख्त नियंत्रण की आशंका ने सप्लाई से जुड़े जोखिम और बढ़ा दिए हैं। यदि चीन सख्ती बरतता है, तो ग्लोबल बाजार में चांदी की उपलब्धता और घट सकती है, जिससे मौजूदा घाटा और गहरा सकता है।

कमजोर डॉलर और रेट कट की उम्मीद से सपोर्ट

आर्थिक मोर्चे पर भी चांदी को मजबूती मिल रही है। कमजोर अमेरिकी डॉलर और भविष्य में US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने कीमती धातुओं की चमक बढ़ाई है। आम तौर पर ग्लोबल यील्ड्स में नरमी से चांदी और सोने जैसी धातुओं में तेजी आती है। वहीं, भारत में रुपये और डॉलर की चाल MCX पर चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही है।

निवेशकों की दिलचस्पी फिर लौटी

लंबे समय तक ETF से आउटफ्लो के बाद अब निवेश मांग में सुधार देखने को मिल रहा है। एक्सिस सिक्योरिटीज के अनुसार, हाल के महीनों में सिल्वर ETF में इनफ्लो देखने को मिला है, जिसने पहले की बिकवाली की भरपाई कर दी है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ग्लोबल स्तर पर बढ़ता कर्ज भी निवेशकों को चांदी जैसे सेफ-हेवन और इंडस्ट्रियल एसेट की ओर आकर्षित कर रहा है।

आगे का आउटलुक

इनक्रीड मनी और टाटा म्यूचुअल फंड की आउटलुक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यम से लंबी अवधि में चांदी का ट्रेंड पॉजिटिव बना रह सकता है। हालांकि, तेज रैली के बाद कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन या मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर अगर मार्जिन बढ़ते हैं या US ब्याज दरों को लेकर संकेत बदलते हैं, तो कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड, सप्लाई संकट और निवेशकों की लौटती दिलचस्पी ने चांदी को एक बार फिर ग्लोबल मार्केट का स्टार बना दिया है।

Next Post

इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी: खाड़ी देशों पर मंडराया विकिरण का खतरा

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि उसके महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्र पर बार-बार हमले किए जा रहे हैं, जिसके गंभीर परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर अब तक चार बार हमला किया है। उनका कहना है कि यदि इन हमलों के कारण रेडियोएक्टिव फॉलआउट (विकिरण का प्रसार) होता है, तो इसका असर ईरान की राजधानी तेहरान से ज्यादा खाड़ी देशों पर पड़ेगा।

खाड़ी देशों के लिए बड़ी चेतावनी

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि संभावित विकिरण का असर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों की राजधानियों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में वहां “जीवन पूरी तरह समाप्त हो सकता है”, जो पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ईरान का दावा: अमेरिका को हुआ नुकसान

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के दो फाइटर जेट, एक A-10 एयरक्राफ्ट, कई हेलीकॉप्टर, दो MQ-9 ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

पश्चिमी देशों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति पर पश्चिमी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमलों को लेकर वही संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु संयंत्रों पर हमले न केवल सैन्य बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद खतरनाक होते हैं। यदि विकिरण फैलता है, तो इसका असर सीमाओं से परे जाकर लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

ईरान ने कहा है कि उस पर यह युद्ध थोपा गया है और वह इसका “स्थायी और सशर्त समाधान” चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्थायी युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

Next Post

Loading more posts...