RSS पर Priyank Kharge का अब तक का सबसे बड़ा हमला: ‘शैतान’ बताया संघ को, BJP को कहा परछाई; फंडिंग, नेटवर्क और लीगल स्टेटस पर उठाए तीखे सवाल

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Javed Haider Zaidi

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प्रियांक खरगे कार्यक्रम में भाषण देते हुए, RSS और BJP पर बयान को लेकर राजनीतिक विवाद।

कर्नाटक के आईटी मंत्री Priyank Kharge (प्रियांक एम० खड़गे) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की तुलना “शैतान” से की और Bharatiya Janata Party (BJP) को उसकी “परछाई” बताया। उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है और राजनीतिक बयानबाज़ी का स्तर एक बार फिर गरमा गया है।

“परछाई से नहीं, शैतान से लड़ें”

अपने संबोधन में प्रियांक खरगे ने कहा, “आज हम शैतान के साये से लड़ रहे हैं। शैतान का साया कौन है? वो BJP है। शैतान कौन है? वो RSS है। अगर हम साये से लड़ना बंद करके सीधे शैतान से लड़ें, तो देश अपने आप बेहतर हो जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि BJP की वैचारिक और संगठनात्मक ताकत RSS से आती है। उनके मुताबिक, “अगर RSS नहीं होता, तो BJP, JD(S) से भी बदतर होती। मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि यह कई क्षेत्रीय पार्टियों से भी बदतर साबित होती।”

खरगे का यह बयान सीधे तौर पर संघ की विचारधारा और उसके राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाता है।

2500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क, विदेशों से फंडिंग का आरोप

आईटी मंत्री ने RSS के संगठनात्मक ढांचे और वित्तीय स्रोतों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संघ से जुड़े 2,500 से अधिक संगठनों का एक व्यापक नेटवर्क है, जो देश और विदेश दोनों जगह सक्रिय है।

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खरगे ने कहा कि अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों से भी फंडिंग होती है और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इतना पैसा कहां से आता है और किस माध्यम से आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं और इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यहां तक कहा कि RSS “मनी लॉन्ड्रिंग” में शामिल हो सकता है और इसके वित्तीय लेनदेन की जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया।

लीगल स्टेटस और रजिस्ट्रेशन पर खुली चुनौती

प्रियांक खरगे ने RSS के कानूनी दर्जे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश के नागरिकों और अन्य संगठनों पर टैक्स और कानूनी नियम लागू होते हैं, तो RSS इससे अलग कैसे रह सकता है।

उन्होंने संघ प्रमुख Mohan Bhagwat के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें RSS को “बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स” बताया गया था और रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता से इनकार किया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा, “आज नहीं तो कल रजिस्ट्रेशन करवाना ही होगा। जब तक संविधान और कानून है, यह होकर रहेगा। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए और संवैधानिक तरीके से कदम उठाने होंगे।”

अन्य संगठनों का भी लिया नाम

अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक ताकतों—चाहे वह RSS हो या Social Democratic Party of India (SDPI)—को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि संविधान से ऊपर कोई संगठन नहीं हो सकता।

सियासी प्रतिक्रिया की संभावना

प्रियांक खरगे के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। BJP और संघ से जुड़े नेताओं द्वारा इसे आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान बताया जा सकता है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे वैचारिक संघर्ष का हिस्सा मान रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब खरगे ने RSS पर सवाल उठाए हों, लेकिन इस बार उनकी भाषा और आरोपों की तीव्रता ने बयान को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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