पाइल्स सर्जरी के बाद भी नहीं मिली सिक लीव: लखनऊ मंडल में लोको पायलट ने दिखाए ऑपरेशन के घाव, रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल

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Javed Haider Zaidi

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लखनऊ रेल मंडल में पाइल्स सर्जरी के बाद सिक लीव न मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी के सामने मेडिकल दस्तावेज दिखाते लोको पायलट का सांकेतिक दृश्य।

रेलवे में ड्यूटी की जिम्मेदारियां जितनी बड़ी होती हैं, उतनी ही जरूरी होती है कर्मचारियों की सेहत और सम्मान की रक्षा। लेकिन लखनऊ रेल मंडल से सामने आया एक मामला इस संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि पाइल्स सर्जरी के बाद भी एक लोको पायलट को निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद सिक लीव नहीं दी गई। हालात ऐसे बने कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारी के सामने अपने ऑपरेशन के घाव तक दिखाने पड़े।

यह घटना अब रेलवे कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है और कर्मचारी संगठनों ने इसे अमानवीय व्यवहार करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स और कर्मचारी संगठन के अनुसार, लखनऊ रेल मंडल में कार्यरत लोको पायलट राजेश मीना ने 22 फरवरी 2026 को पाइल्स की सर्जरी कराई थी। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी और 22 फरवरी से 28 फरवरी तक की छुट्टी स्वीकृत की गई।

हालांकि निर्धारित अवधि के बाद भी घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हुए थे। ऐसे में राजेश मीना ने रेलवे हेल्थ यूनिट में जांच कराई। यूनियन का दावा है कि डॉक्टर ने स्थिति को देखते हुए आराम की अवधि बढ़ाने की आवश्यकता बताई और आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से सिक मेमो लाने को कहा।

मेडिकल दस्तावेज दिखाने के बाद भी नहीं मिली राहत

बताया जा रहा है कि राजेश मीना ने क्रू कंट्रोलर और बाद में चीफ क्रू कंट्रोलर (CCC) से संपर्क किया। उन्होंने अपने मेडिकल दस्तावेज, लैब रिपोर्ट और ड्रेसिंग तक दिखाईं, लेकिन कथित तौर पर उन्हें अवकाश देने में टालमटोल की गई।

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यूनियन का आरोप है कि बार-बार आग्रह और दस्तावेज दिखाने के बावजूद जब उन्हें छुट्टी नहीं दी गई, तो मानसिक दबाव और शारीरिक पीड़ा के बीच उन्होंने मजबूरी में वरिष्ठ अधिकारी के सामने अपने ऑपरेशन के घाव दिखा दिए। इस घटना का एक वीडियो रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप समूहों में वायरल हो गया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

यूनियन का आरोप और हस्तक्षेप

All India Loco Running Staff Association (AILRSA) के नेताओं ने इस घटना को बेहद शर्मनाक और अपमानजनक बताया है। संगठन के महासचिव के सी जेम्स ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को मेडिकल लीव के लिए इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़े, यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का उदाहरण है।

यूनियन के हस्तक्षेप के बाद अंततः राजेश मीना को आराम के लिए अवकाश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।

रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक कर्मचारी की छुट्टी का नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर संवेदनशीलता और मानवीय गरिमा से जुड़ा है। लोको पायलट जैसे पद पर कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी समस्या के बावजूद काम करने का दबाव न केवल कर्मचारी के लिए, बल्कि सिस्टम के लिए भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के बीच इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि मेडिकल लीव से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

मानवीय संवेदना की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों के पालन के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है? एक कर्मचारी को अपनी पीड़ा साबित करने के लिए इस हद तक जाना पड़े, यह किसी भी संस्थान के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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Javed Haider Zaidi

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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