नोएडा हाई-राइज हादसा: इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारी क्यों गिर गए 17वीं मंजिल से?

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Javed Haider Zaidi

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नोएडा हाई-राइज अपार्टमेंट में इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारी की बालकनी से गिरने की घटना

नोएडा के एक हाई-राइज अपार्टमेंट में शुक्रवार को एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना हुई, जिसमें इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारी 17वीं मंजिल से गिर गए। अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अधिकारी मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण बालकनी में खड़े थे और इसी दौरान अचानक संतुलन खो बैठने के कारण यह हादसा हुआ।

मौके पर पहुंची एंबुलेंस ने उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। पुलिस ने अपार्टमेंट को सील कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना का विवरण:
जानकारी के अनुसार, अधिकारी अपार्टमेंट की 17वीं मंजिल पर अपने कमरे में थे। मोबाइल नेटवर्क ठीक न होने के कारण वह बालकनी में आए ताकि फोन कॉल कर सकें। तभी अचानक संतुलन खोने के कारण वह गिर गए। घटना के समय अपार्टमेंट में अन्य निवासी मौजूद थे जिन्होंने तुरंत मदद के लिए आवाज दी।

पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि यह हादसा असावधानी और अचानक संतुलन खोने के कारण हुआ, लेकिन फॉरेंसिक जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

इंडियन ऑयल और सहकर्मियों की प्रतिक्रिया:
इंडियन ऑयल ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और अधिकारी के परिवार के साथ हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उनके सहकर्मी और नजदीकी रिश्तेदार भी इस अनहोनी घटना से स्तब्ध हैं। इंडियन ऑयल की ओर से कहा गया कि वे परिवार के लिए हर तरह का समर्थन प्रदान करेंगे और इस हादसे की जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे।

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हाई-राइज अपार्टमेंट सुरक्षा पर सवाल:
इस घटना ने हाई-राइज अपार्टमेंट्स में सुरक्षा उपायों के मुद्दे को भी फिर से सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या अन्य तकनीकी कारणों से बालकनी या खिड़कियों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। उच्च मंजिलों पर रहने वालों के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि बालकनी पर सुरक्षा ग्रिल या बार लगाना और मोबाइल उपयोग के समय अकेले खड़े न होना अत्यंत जरूरी है। कई बार छोटे-छोटे लापरवाही भरे कदम जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं।

पुलिस जांच:
नोएडा पुलिस ने कहा कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने अपार्टमेंट के सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और सुरक्षा उपायों का विवरण एकत्र करना शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि यह हादसा लापरवाही के कारण हुआ, लेकिन अंतिम रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

पुलिस ने अपील की है कि उच्च मंजिलों पर रहने वाले लोग बालकनी और खिड़कियों का इस्तेमाल करते समय हमेशा सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की असावधानी से बचें।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया:
अधिकारियों की अचानक मौत ने उनके परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों को गहरा दुख दिया है। कई लोग सोशल मीडिया पर उनके प्रति श्रद्धांजलि और संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को चेताया है कि जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तकनीकी या साधारण काम के लिए जोखिम नहीं उठाना चाहिए।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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