जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

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सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा में विवादित प्रश्न पर बवाल, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिए जांच के आदेश

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यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा में विवादित प्रश्न को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और बीजेपी नेता अभिजात मिश्रा ने संवेदनशीलता और जांच की आवश्यकता पर बयान दिया।

उत्तर प्रदेश में आयोजित हुई पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा एक विवादित प्रश्न को लेकर चर्चा में आ गई है। परीक्षा में पूछे गए एक सवाल और उसके विकल्पों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आपत्ति जताई जा रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

दरअसल, शनिवार को आयोजित हुई परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था—“अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द बताइए।” इस प्रश्न के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द भी शामिल किया गया था। इसी विकल्प को लेकर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों का कहना है कि इस तरह का विकल्प किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जताई नाराजगी

उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न के विकल्पों पर गंभीर आपत्ति है।

उन्होंने लिखा कि सरकार ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है और इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उनका कहना है कि किसी भी प्रश्न या विकल्प के जरिए किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।

ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान और समानता के सिद्धांत पर काम करती है। ऐसे में किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों या संकेतों को किसी भी रूप में जगह नहीं दी जा सकती।

जिम्मेदार लोगों पर हो सकती है कार्रवाई

डिप्टी सीएम ने कहा कि इस मामले की तत्काल जांच कराई जाएगी। अगर जांच में किसी की लापरवाही या गलत मंशा सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में इस तरह की संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है।

बीजेपी नेता ने भी उठाए सवाल

इस मुद्दे पर बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व महामंत्री अभिजात मिश्रा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रश्न तैयार किया गया और उसमें ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किया गया, वह पूरी तरह से गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जिन लोगों ने इस मानसिकता के साथ प्रश्नपत्र तैयार किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में दोष साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए।

ब्राह्मण समाज के योगदान का भी किया जिक्र

उन्होंने यह भी कहा कि देश की आजादी और विकास में हर जाति और समुदाय का योगदान रहा है। ब्राह्मण समाज का भी देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में किसी भी समुदाय के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए।

परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस पूरे विवाद के बाद भर्ती परीक्षाओं की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों।

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