निशांत नहीं, नीतीश कुमार ही राज्यसभा जाएं: JDU नेता का बड़ा इशारा, बिहार की राजनीति में बदलाव का संकेत

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Javed Haider Zaidi

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बिहार की राजनीति: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और राज्यसभा भेजे जाने पर JDU नेता का बड़ा बयान, निशांत की जगह नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने का सुझाव

बिहार की सियासत इन दिनों बेहद गर्म है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं ने पार्टी और विपक्ष दोनों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेताओं ने इस पर चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसमें उन्होंने निशांत के राज्यसभा जाने की संभावना पर सवाल उठाए हैं और संकेत दिया है कि अगर राज्यसभा का रास्ता खुलना ही है तो निशांत के बजाय नीतीश कुमार को ही भेजा जाना चाहिए।

निशांत की राजनीति बिहार में ही रहे

JDU के एक वरिष्ठ नेता ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा, “अगर निशांत कुमार को राजनीति में उतारा जा रहा है, तो उनका फोकस बिहार की राजनीति पर होना चाहिए, दिल्ली या केंद्र की राजनीति पर नहीं। नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में एनडीए और जेडीयू के लिए जो राजनीतिक विरासत बनाई है, उसे आगे निशांत बढ़ा सकते हैं। ऐसे में उन्हें सीधे राज्यसभा क्यों भेजा जाए?”

इस बयान से स्पष्ट होता है कि पार्टी के अंदर निशांत को सीधे राज्यसभा भेजने को लेकर मतभेद हैं। वरिष्ठ नेता का यह भी मानना है कि निशांत को एमएलसी कोटे की सीट पर बिहार में सक्रिय रहकर पार्टी को मजबूत करना चाहिए।

राज्यसभा में नीतीश कुमार? राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं

यदि JDU के इस इशारे को गंभीरता से लिया जाए और राज्यसभा का रास्ता निशांत के बजाय नीतीश कुमार के लिए खुलता है, तो बिहार में सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में निशांत कुमार बिहार में उपमुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं और पार्टी का नेतृत्व अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं।

सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसके पास रहेगी। JDU नेताओं का कहना है कि बीजेपी कब और क्या फैसला ले, यह कोई नहीं जानता। इसके चलते बिहार में सत्ता और प्रशासन के स्तर पर बड़े बदलाव की संभावना बनी हुई है।

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राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह कदम JDU की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी चाहती है कि निशांत कुमार बिहार में पार्टी की जड़ों को मजबूत करें और युवाओं को जोड़ें। यदि निशांत राज्यसभा चले जाते हैं, तो उनके पास स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने का अवसर सीमित हो जाएगा।

इसके अलावा, यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो यह बीजेपी और एनडीए के लिए भी नए राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकता है। बिहार में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं के बीच यह कदम सियासी माहौल को और गर्मा सकता है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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