नेपाल में बढ़ा तनाव: बीरगंज के भारत सीमा से सटे इलाकों में कर्फ्यू लागू

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Javed Haider Zaidi

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नेपाल के बीरगंज शहर में भारत सीमा से सटे इलाके में कर्फ्यू का दृश्य, पुलिस तैनात

नेपाल के भारत सीमा से सटे क्षेत्रों में फिर से हालात बिगड़ गए हैं। परसा जिले के बीरगंज शहर में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और संभावित झड़पों को देखते हुए सोमवार दोपहर से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बीरगंज महानगर के संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, जुलूस या प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। यह कदम उस वीडियो के प्रसार के एक दिन बाद उठाया गया है, जिसने सोशल मीडिया पर आग को हवा दे दी थी।

कर्फ्यू की समय सीमा और क्षेत्र
परसा जिला प्रशासन कार्यालय (DAO) द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, कर्फ्यू सोमवार दोपहर एक बजे से लागू किया गया और अगले आदेश तक जारी रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र पूर्व में बस पार्क से पश्चिम में सिरसिया ब्रिज और उत्तर में पावर हाउस चौक से दक्षिण में शंकराचार्य गेट तक फैला हुआ है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी
मुख्य अधिकारी भोला दहाल ने स्पष्ट किया कि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया है।

स्थानीय लोग प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर हिंसा फैलाने वाले संदेशों के प्रसार पर निगरानी तेज कर दी गई है।

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नेपाल में यह घटनाक्रम उस क्षेत्र की संवेदनशील सामाजिक स्थिति को फिर से उजागर करता है, और सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा और शांति बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।

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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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