पूर्व IPS अधिकारी आर. एन. रवि बने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

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Javed Haider Zaidi

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पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेते पूर्व आईपीएस अधिकारी आर. एन. रवि, समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद।

आर. एन. रवि ने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में ली शपथ

पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी R. N. Ravi ने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। उन्हें Sujoy Paul, मुख्य न्यायाधीश, Calcutta High Court ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह समारोह कोलकाता के राजभवन में आयोजित किया गया, जिसमें राज्य सरकार और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee, विधानसभा अध्यक्ष Biman Banerjee, कोलकाता के मेयर Firhad Hakim और वाम मोर्चा के अध्यक्ष Biman Bose भी मौजूद रहे। हालांकि कार्यक्रम में विपक्षी दल Bharatiya Janata Party के किसी नेता की मौजूदगी नहीं देखी गई।

राज्य के मुख्य सचिव Nandini Chakraborty समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।

सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद हुई नियुक्ति

दरअसल, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल C. V. Ananda Bose के पांच मार्च को इस्तीफा देने के बाद केंद्र सरकार ने आर. एन. रवि को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। इससे पहले भी रवि कई महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं।

उन्होंने Nagaland, Meghalaya और Tamil Nadu के राज्यपाल के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है। प्रशासनिक अनुभव और सुरक्षा मामलों की गहरी समझ के कारण उन्हें केंद्र सरकार में भी कई अहम जिम्मेदारियां दी गई थीं।

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1976 बैच के आईपीएस अधिकारी

आर. एन. रवि का जन्म Patna, Bihar में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1974 में फिजिक्स में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की और 1976 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने देश के कई संवेदनशील इलाकों में काम किया।

उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) में भी सेवाएं दीं और संगठित अपराध के खिलाफ कई महत्वपूर्ण एंटी-करप्शन अभियानों का नेतृत्व किया। उनकी पहचान एक सख्त और अनुभवी पुलिस अधिकारी के रूप में रही है।

खुफिया एजेंसियों में भी निभाई अहम भूमिका

आर. एन. रवि ने Intelligence Bureau और Ministry of Home Affairs में भी काम किया, जहां उन्होंने उग्रवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से काम किया।

उन्होंने Jammu and Kashmir, उत्तर-पूर्वी राज्यों और माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और खुफिया अभियानों का नेतृत्व किया। दक्षिण एशिया में मानव प्रवासन और सीमावर्ती इलाकों की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी उन्होंने व्यापक अध्ययन किया।

संघर्ष समाधान और शांति प्रक्रिया में योगदान

आर. एन. रवि को संघर्षग्रस्त इलाकों में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कई सशस्त्र विद्रोही समूहों को मुख्यधारा में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई। आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की रणनीति बनाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सरकारी सेवा से 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय अखबारों में नियमित रूप से लेख और कॉलम लिखे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और रणनीतिक मामलों पर उनके विचार सामने आते रहे।

नागा शांति वार्ता के इंटरलोक्यूटर भी रहे

वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने आर. एन. रवि को नागा शांति वार्ता के लिए आधिकारिक इंटरलोक्यूटर नियुक्त किया था। उन्होंने बातचीत की प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाते हुए अलग-अलग हितधारकों को साथ लाने की कोशिश की।

उनके प्रयासों के बाद कई सशस्त्र विद्रोही संगठनों ने भारतीय संविधान के दायरे में समाधान के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे उत्तर-पूर्व भारत में शांति प्रक्रिया को नई दिशा मिली।

बाद में अक्टूबर 2018 में उन्हें देश का डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर सरकार को सलाह दी।

पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में आर. एन. रवि के सामने अब राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ केंद्र और राज्य के बीच संतुलन बनाए रखने की भी महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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