कोलकाता में पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन: ‘बंगाल के चाणक्य’ के जाने से सियासत में शोक की लहर

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Javed Haider Zaidi

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पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का कोलकाता में निधन, 72 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी और कोमा के बाद कार्डियक अरेस्ट से मौत, टीएमसी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री Mukul Roy का देर रात निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। जानकारी के अनुसार, रात करीब 2:35 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कई महीनों से वह कोमा में थे और लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

लंबे समय से चल रही थी बीमारी

मुकुल रॉय बीते कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर थे। 2023 की शुरुआत में डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि वह डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। इन बीमारियों के कारण उनकी स्मरण शक्ति और शारीरिक क्षमताएं काफी प्रभावित हो गई थीं। हालात बिगड़ने के बाद उन्हें कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह कई महीनों से कोमा में थे। चिकित्सकों के अनुसार, उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ।

ममता बनर्जी के बाद टीएमसी में सबसे प्रभावशाली नेता

पश्चिम बंगाल की सियासत में मुकुल रॉय को लंबे समय तक Mamata Banerjee के बाद तृणमूल कांग्रेस का दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वह All India Trinamool Congress के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पार्टी के भीतर उन्हें संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता था। चुनावी रणनीति बनाना, संगठन का विस्तार करना और राजनीतिक संकटों से निपटना—इन सभी में उनकी विशेष पकड़ थी। बंगाल की राजनीति में उन्हें ‘बंगाल का चाणक्य’ भी कहा जाता था।

टीएमसी से दूरी और बीजेपी में शामिल होने का फैसला

2010 के दशक में पार्टी नेतृत्व से उनके संबंधों में खटास आ गई। शारदा चिटफंड घोटाले समेत कई मुद्दों पर मतभेद बढ़े। फरवरी 2015 में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया और सितंबर 2017 में उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

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इसके बाद नवंबर 2017 में वह Bharatiya Janata Party में शामिल हो गए। बीजेपी में रहते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, जून 2021 में उन्होंने एक बार फिर टीएमसी में वापसी कर ली। उनकी वापसी ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी थी।

राजनीतिक जीवन का लंबा अनुभव

मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्रालय से जुड़े पद पर भी रहे। संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक सोच के कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्हें चुनावी गणित का माहिर खिलाड़ी माना जाता था।

राजनीतिक गलियारों में शोक

उनके निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। वहीं, भाजपा नेताओं ने भी उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकुल रॉय के निधन के साथ ही बंगाल की राजनीति का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया।

एक युग का अंत

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हर दौर में अपनी रणनीतिक क्षमता से अलग पहचान बनाई। चाहे संगठन निर्माण की बात हो या चुनावी रणनीति की, उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।

उनके जाने से न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है। ‘बंगाल के चाणक्य’ के रूप में पहचाने जाने वाले मुकुल रॉय अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत और रणनीतिक सोच को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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