कुत्ते के काटने के चार महीने बाद सामने आए खतरनाक लक्षण
यह मामला मिर्जापुर जिले के कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव का है। गांव के रहने वाले भाईलाल का 17 वर्षीय बेटा करीब चार महीने पहले अपने ननिहाल गया हुआ था। वहीं उसे एक कुत्ते ने काट लिया था।
परिजनों के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद किशोर को ननिहाल में एंटी-रेबीज का पहला इंजेक्शन लगाया गया था। इसके बाद दूसरा इंजेक्शन कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगाया गया, लेकिन इसके बाद जरूरी बाकी चार इंजेक्शन नहीं लगवाए गए। डॉक्टरों के मुताबिक एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी होता है, लेकिन परिवार की लापरवाही के कारण किशोर को पूरा डोज नहीं मिल सका। इसका असर अब चार महीने बाद सामने आया है।
अचानक बदल गया व्यवहार, कुत्ते की तरह भौंकने लगा किशोर
परिवार के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से किशोर का व्यवहार अचानक बदलने लगा। वह अजीब तरीके से आवाज निकालने लगा और धीरे-धीरे उसकी आवाज कुत्ते के भौंकने जैसी होने लगी।
इतना ही नहीं, उसके चलने, उठने और बैठने का तरीका भी बदल गया। आसपास के लोगों ने जब उसे इस तरह भौंकते देखा तो मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
गांव के लोगों ने परिवार को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने की सलाह दी।
मंदिरों में मन्नतें मांगते दिखे पिता
बताया जा रहा है कि किशोर के दिव्यांग पिता भाईलाल अपने बेटे को लेकर जमुआ चौराहे स्थित श्री राम जानकी मंदिर और हनुमान मंदिर तक पहुंचे और भगवान से बेटे के ठीक होने की मन्नतें मांगते रहे।
वह कभी बेटे को मंदिर ले जाते तो कभी अस्पताल। बेटे की हालत देखकर पिता बेहद परेशान और बेबस नजर आए।
स्थानीय लोगों की सलाह पर बाद में एंबुलेंस की मदद से किशोर को कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की।
डॉक्टरों ने बताई बेहद गंभीर स्थिति
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पंकज पांडेय के अनुसार, किशोर में जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं वह रेबीज के गंभीर चरण के हैं।
उन्होंने बताया कि जब कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स नहीं लिया जाता तो वायरस धीरे-धीरे शरीर में फैलता है और बाद में हाइड्रोफोबिया की स्थिति पैदा हो जाती है।
डॉक्टर के मुताबिक इस स्थिति में मरीज को पानी से डर लगने लगता है, सांस की नली सिकुड़ने लगती है और आवाज भी बदल जाती है। कई मामलों में मरीज कुत्ते की तरह आवाज निकालने लगता है।
उन्होंने कहा कि एक बार रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगें तो मरीज को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
डॉक्टरों की अपील: कुत्ते के काटते ही पूरा वैक्सीन कोर्स जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते या किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने के बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स समय पर लेना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
मिर्जापुर का यह मामला एक गंभीर चेतावनी की तरह है कि कुत्ते के काटने को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है और समय पर इलाज ही जीवन बचा सकता है।