LPG सिलेंडर महंगा हुआ, कमर्शियल सिलेंडर 111 रुपये तक बढ़ा, घरेलू सिलेंडर फिलहाल स्थिर

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Javed Haider Zaidi

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"2026 में LPG सिलेंडर की नई कीमत, कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ"

दिल्ली: LPG सिलेंडर महंगा हुआ 1 जनवरी 2026: नए साल की पहली सुबह से ही एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि ने उपभोक्ताओं और व्यवसायों के बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 111 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,691.50 रुपये हो गई है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत अन्य महानगरों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी लागू की गई है।

वहीं घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर बनी हुई है, जिससे घरों में खाना पकाने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और विदेशी विनिमय दर के आधार पर तय किए जाते हैं। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और मुंबई के छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों के मालिक इस इजाफे से सीधे प्रभावित होंगे। एक रेस्तरां संचालक ने कहा कि “रोजाना खाना पकाने का खर्च बढ़ जाएगा और छोटे व्यवसायों के लिए यह इजाफा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।”

किराना स्टोर और गैस एजेंसी के कर्मचारी भी ग्राहकों से लगातार नई कीमत के बारे में पूछताछ का सामना कर रहे हैं। कोलकाता में एक गृहिणी ने बताया कि घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रहने से घर का खर्च फिलहाल सामान्य ही रहेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और सरकारी नीतियों के आधार पर कमर्शियल और घरेलू दोनों सिलेंडरों की कीमतों में और बदलाव संभव है।

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2026 का पहला दिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत लेकर आया है, जो उपभोक्ताओं और व्यापार मालिकों के लिए महंगाई का पहला झटका साबित हुआ। घरेलू सिलेंडर फिलहाल स्थिर है, लेकिन भविष्य में बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इसमें भी बदलाव संभव हैं।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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