जापान दौरे पर सीएम योगी का अनुशासित जीवनशैली संदेश, बिना लहसुन-प्याज के शुद्ध शाकाहारी भोजन की विशेष व्यवस्था

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Javed Haider Zaidi

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सीएम योगी आदित्यनाथ जापान दौरे के दौरान टोक्यो में आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होते हुए, शुद्ध शाकाहारी भोजन व्यवस्था के बीच भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करते हुए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath इन दिनों जापान के आधिकारिक दौरे पर हैं। निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू हुई इस यात्रा में जहां आर्थिक कूटनीति पर फोकस है, वहीं मुख्यमंत्री की सादगीपूर्ण जीवनशैली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जापान में उनके लिए विशेष रूप से बिना लहसुन-प्याज वाला शुद्ध शाकाहारी भोजन तैयार किया जा रहा है।

खान-पान के नियमों से कोई समझौता नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सादे और अनुशासित जीवन के लिए जाने जाते हैं। विदेश दौरे पर भी वे अपने खान-पान के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। जापान में उनके लिए ऐसे भोजन की व्यवस्था की गई है जिसमें न तो प्याज और न ही लहसुन का प्रयोग होगा।

भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रोटोकॉल टीम ने उनके भोजन की पसंद और धार्मिक अनुशासन को ध्यान में रखते हुए जापानी शेफ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के लिए शुद्ध शाकाहारी नाश्ते का विशेष मेनू तैयार किया गया है।

मिसो सूप, टोफू और उबली सब्जियां होंगी मेनू में शामिल

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के लिए जापानी व्यंजन ‘मिसो सूप’ विशेष तरीके से तैयार किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक स्वाद बरकरार रखते हुए लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाएगा। ‘टोफू’ (सोया पनीर) को भी उनके भोजन में शामिल किया गया है। इसके अलावा उबली हुई सब्जियां, सादा चावल, हल्का सूप और सोया दूध मेनू का हिस्सा हैं।

सुबह के समय मुख्यमंत्री हर्बल चाय या गर्म पानी का सेवन करेंगे। उनका भोजन सादा, सात्विक और हल्का रखा गया है, ताकि व्यस्त कार्यक्रमों के बीच स्वास्थ्य और ऊर्जा का संतुलन बना रहे।

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टोक्यो में गर्मजोशी से स्वागत

जापान की राजधानी Tokyo पहुंचने पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। यामानाशी प्रीफेक्चर के वाइस गवर्नर जुनिची इशिडेरा और वहां मौजूद भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन किया।

जापान में भारत की राजदूत नगमा एम. मलिक ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे उत्तर प्रदेश के लिए निवेश के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

निवेश और औद्योगिक सहयोग पर फोकस

मुख्यमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करना और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

इससे पहले सिंगापुर यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने लगभग 6000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए थे। अधिकारियों का कहना है कि जापान दौरा भी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती दी जाएगी।

सादगी और कूटनीति का संतुलन

विदेशी दौरे पर भी मुख्यमंत्री का अपने मूल संस्कारों और अनुशासन से जुड़ा रहना एक संदेश देता है। जहां एक ओर वे वैश्विक निवेशकों से संवाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत जीवनशैली के सिद्धांतों का पालन भी कर रहे हैं।

जापान में उनके खान-पान की विशेष व्यवस्था केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान भी है। इस दौरे से उत्तर प्रदेश को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, साथ ही राज्य की छवि एक अनुशासित और निर्णायक नेतृत्व वाले प्रदेश के रूप में और मजबूत हो रही है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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