चांदी में 2,700 रुपये से ज्यादा की बड़ी गिरावट, सोना भी हुआ सस्ता – जानिए ताजा भाव और गिरावट की वजह

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Javed Haider Zaidi

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“Gold Silver Price Today: MCX पर चांदी में 2700 रुपये से ज्यादा की गिरावट, सोना भी हुआ सस्ता”

Gold-Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार MCX में कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुओं पर दबाव नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ा, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों की चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर में मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली के कारण सोने-चांदी के दाम फिसले हैं।

MCX पर सोना-चांदी के ताजा भाव

घरेलू वायदा बाजार MCX पर चांदी में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

  • MCX Silver (मार्च वायदा):
    चांदी की कीमत 2,700 रुपये से ज्यादा टूट गई। यह 2,91,565 रुपये के स्तर से फिसलकर करीब 2,88,824 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। यानी इसमें करीब 0.94% की गिरावट दर्ज की गई।
  • MCX Gold (फरवरी वायदा):
    सोना भी दबाव में रहा और इसमें 372 रुपये की गिरावट आई। सोना घटकर 1,42,743 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो पहले 1,43,115 रुपये था। प्रतिशत के लिहाज से इसमें करीब 0.26% की कमजोरी दर्ज हुई।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी के चलते सोना-चांदी के दाम दबाव में नजर आए।
(Image Source: Unsplash)

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखी कमजोरी

केवल घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी के दाम दबाव में नजर आए।

  • हाजिर सोना (Spot Gold):
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 0.29% गिरकर 4,602.43 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
  • चांदी (Spot Silver):
    चांदी में भी गिरावट रही और यह करीब 0.8% टूटकर 91.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वजहें

1. डॉलर इंडेक्स में मजबूती
अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 99.49 के स्तर पर पहुंच गया, जो दिसंबर की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। मजबूत डॉलर की वजह से सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है।

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2. भू-राजनीतिक तनाव में कमी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर नरम रुख ने भी बाजार की धारणा बदली है। ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान पर तुरंत सख्त टैरिफ नहीं लगाए जाएंगे और बातचीत के रास्ते खुले रहेंगे। इससे वैश्विक तनाव कुछ कम हुआ और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी की मांग घटी।

3. मुनाफावसूली का दबाव
हाल ही में चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 93.57 डॉलर प्रति औंस के अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

आगे क्या हो सकता है सोने-चांदी का रुख?

बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका से जुड़े अहम घटनाक्रमों पर टिकी है।

विशेष रूप से:

  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ से जुड़े फैसले
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर संकेत

यदि आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े नियंत्रण में रहते हैं, तो फेड साल के अंत तक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। ऐसे में सोने-चांदी को दोबारा समर्थन मिल सकता है और कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में लंबी अवधि के निवेशक गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देख सकते हैं, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार की दिशा फिलहाल वैश्विक संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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