महंगे दाम और बाजार में अस्थिरता के चलते आम निवेशक और खरीदारों ने सोने और चांदी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में इन कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
सोने और चांदी की वायदा कीमतों में सोमवार को गंभीर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, 2 अप्रैल की डिलीवरी अनुबंध के लिए सोने की कीमत में पिछले सत्र की तुलना में 1.11 प्रतिशत की कमी हुई और यह ₹1,56,706 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसी समय 5 मई की डिलीवरी अनुबंध के लिए चांदी की कीमत 1.79 प्रतिशत घटकर ₹2,54,803 प्रति किलोग्राम रह गई।
महानगरों में सोने का हाजिर भाव
goodreturns की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख शहरों में सोने के भाव इस प्रकार हैं:
दिल्ली:
- 24 कैरेट: ₹15,930 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट: ₹14,605 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट: ₹11,953 प्रति ग्राम
मुंबई:
- 24 कैरेट: ₹15,917 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट: ₹14,590 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट: ₹11,938 प्रति ग्राम
कोलकाता:
- 24 कैरेट: ₹15,917 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट: ₹14,590 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट: ₹11,938 प्रति ग्राम
चेन्नई:
- 24 कैरेट: ₹16,101 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट: ₹14,759 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट: ₹12,399 प्रति ग्राम
बैंगलुरु:
- 24 कैरेट: ₹15,917 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट: ₹14,590 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट: ₹11,938 प्रति ग्राम
इन आंकड़ों से पता चलता है कि चेन्नई में सोने की कीमत अन्य महानगरों की तुलना में सबसे अधिक है, जबकि दिल्ली में भी 24 कैरेट सोने का भाव ऊंचा है। निवेशक और गहनों के खरीदार इन मौजूदा भावों के अनुसार अपनी खरीदारी और निवेश की योजना बना सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोना
TradingEconomics की रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत सोमवार को दो हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद लगभग $5,000 प्रति औंस पर स्थिर रही। वैश्विक बाजार में अस्थिरता के पीछे मुख्य कारण तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप पर किए गए हमले हैं। इसके बाद ईरान ने इजराइल और अन्य अरब देशों की ऊर्जा संरचना पर प्रतिशोधी हमले किए, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई।
तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की बढ़त ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों से ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को कम कर दिया है। इस वजह से गैर-उपज देने वाले कीमती धातुओं के लिए बाजार में चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक इन उतार-चढ़ावों के बीच सोच-समझकर ही सोने और चांदी में निवेश करें और मौजूदा भावों के आधार पर योजना बनाएं।