गंगा स्नान पर्व पर प्रयागराज में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। 22 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई। पढ़ें पूरी खबर।
Magh Mela 2026 (माघ मेले): पवित्र गंगा स्नान पर्व के अवसर पर प्रयागराज में आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। रविवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि घाटों तक पहुंचना भी चुनौती बन गया। प्रशासन के अनुसार, पूरे दिन में 22 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई, जिससे यह स्नान पर्व अब तक के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गया।
कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और साधु-संत सभी ने गंगा स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। संगम क्षेत्र में हर ओर भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का माहौल नजर आया।
ब्रह्ममुहूर्त से ही घाटों पर उमड़ी भारी भीड़
स्नान का सिलसिला तड़के सुबह चार बजे ब्रह्ममुहूर्त से ही शुरू हो गया था। संगम नोज, दारागंज, अरैल, झूंसी और फाफामऊ घाटों पर सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु आधी रात से ही घाटों के पास डेरा डालकर बैठे थे, ताकि शुभ मुहूर्त में स्नान कर सकें।
दोपहर तक श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती चली गई। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक ही 18 लाख से ज्यादा लोग गंगा स्नान कर चुके थे, जबकि शाम होते-होते यह संख्या 22 लाख के पार पहुंच गई। घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें कई किलोमीटर तक फैली रहीं।
धार्मिक मान्यताओं के कारण देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
हिंदू धर्म में गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है, रोग दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे।
कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर वर्ष इस दिन गंगा स्नान के लिए आते हैं और इसे अपने जीवन का सबसे पवित्र क्षण मानते हैं। परिवार के साथ आए लोगों ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना और दान-पुण्य भी किया।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक इंतजाम पूरी तरह सख्त
श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। घाटों पर पुलिस, पीएसी, एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें तैनात रहीं। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की गई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई स्थानों पर मेडिकल कैंप लगाए गए थे। एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें लगातार अलर्ट मोड पर रहीं। ठंड के कारण कुछ श्रद्धालुओं को हल्की परेशानी हुई, लेकिन समय पर इलाज मिलने से स्थिति नियंत्रण में रही।
संतों और अखाड़ों की मौजूदगी से बना आध्यात्मिक माहौल
गंगा स्नान पर्व के दौरान विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा और साधु भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मंत्रोच्चार, शंखनाद और वैदिक अनुष्ठानों के साथ संतों ने विधि-विधान से स्नान किया। श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद लिया और धर्म-कर्म में भाग लिया।
अखाड़ों की मौजूदगी से संगम क्षेत्र पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
स्थानीय व्यापार और धार्मिक पर्यटन को मिला बड़ा लाभ
Magh Mela 2026 और गंगा स्नान पर्व के चलते प्रयागराज में धार्मिक पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिला। होटल, लॉज, धर्मशालाएं पूरी तरह भरी रहीं। नाविकों, फूल विक्रेताओं, पूजा सामग्री बेचने वालों और छोटे दुकानदारों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस स्नान पर्व ने उनकी आजीविका को मजबूती दी है और आने वाले स्नान पर्वों से उन्हें और बेहतर व्यापार की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या
प्रशासन का अनुमान है कि आने वाले प्रमुख स्नान पर्वों और विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ सकती है। इसके लिए पहले से अतिरिक्त घाट, पार्किंग, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस स्नान पर्व का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और यह प्रयागराज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर मजबूत करता है।