Donald Trump: बाइडन दौर की विदेश नीति पर ब्रेक, 30 देशों से अमेरिकी राजदूत वापस बुलाए

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Javed Haider Zaidi

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विदेश नीति पर बयान देते हुए

Diplomacy Reset: अमेरिका की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति Donald Trump ने सत्ता संभालते ही Joe Biden प्रशासन के दौरान नियुक्त किए गए करीब 30 देशों के अमेरिकी राजदूतों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। इस फैसले को अमेरिका की विदेश नीति में एक बड़े “री-सेट” के तौर पर देखा जा रहा है।

व्हाइट हाउस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह कदम किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई अहम देशों पर पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिका के राजनयिक प्रतिनिधि राष्ट्रपति की नीतियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप होने चाहिए।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि:

  • अमेरिकी राजदूत राष्ट्रपति के भरोसे पर काम करते हैं
  • नई सरकार के साथ नई विदेश नीति लागू करना जरूरी है
  • पुराने प्रशासन के प्रतिनिधि नई रणनीति में बाधा बन सकते हैं

इसी वजह से ट्रंप ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कई वरिष्ठ राजनयिकों को वॉशिंगटन लौटने के निर्देश दिए हैं।

किन क्षेत्रों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

इस फैसले से सबसे अधिक असर अफ्रीकी देशों में देखने को मिला है, जहां कई अहम अमेरिकी दूतावासों में बदलाव किया गया है। इसके अलावा:

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  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी राजनयिक फेरबदल
  • यूरोप के रणनीतिक देशों में नई नियुक्तियों की तैयारी
  • मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में भी बदलाव तय

हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लौटाए गए राजदूतों को चाहें तो स्टेट डिपार्टमेंट में अन्य जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस फैसले को लेकर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आलोचकों का कहना है कि अचानक बदलाव से कूटनीतिक रिश्तों में अस्थिरता आ सकती है, जबकि समर्थकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देने के लिए जरूरी था।

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस पर है कि:

  • नए राजदूत किन देशों में भेजे जाएंगे
  • ट्रंप की विदेश नीति कितनी आक्रामक होगी
  • वैश्विक मंच पर अमेरिका की भूमिका कैसे बदलेगी

यह साफ है कि ट्रंप का यह फैसला आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है

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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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