दिल्ली को मिला नया उपराज्यपाल: कौन हैं तरनजीत सिंह संधू? अमेरिका से श्रीलंका तक भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके अनुभवी राजनयिक

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Javed Haider Zaidi

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दिल्ली के नए उपराज्यपाल बने पूर्व भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू, जिन्होंने अमेरिका और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को नया उपराज्यपाल मिल गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह अब तक इस पद पर कार्यरत विनय कुमार सक्सेना की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे।

तरनजीत सिंह संधू का नाम भारतीय कूटनीति की दुनिया में काफी सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) में रहते हुए कई महत्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और विदेश नीति के कई अहम मोर्चों पर काम किया।

दिल्ली जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक और सियासी दोनों ही दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी रहे हैं संधू

तरनजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और भारत की विदेश नीति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी पहचान एक ऐसे राजनयिक के रूप में रही है, जिन्होंने जटिल कूटनीतिक परिस्थितियों में भी संतुलित और प्रभावी भूमिका निभाई।

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अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में निभाई बड़ी भूमिका

तरनजीत सिंह संधू का सबसे चर्चित कार्यकाल अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में रहा। उन्होंने वॉशिंगटन डीसी में भारतीय मिशन का नेतृत्व किया और भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रक्षा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रिश्तों के दौर में उनका योगदान कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम माना जाता है।

श्रीलंका में भी संभाल चुके हैं उच्चायुक्त की जिम्मेदारी

अमेरिका से पहले तरनजीत सिंह संधू श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त भी रह चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2017 से 2020 तक इस पद पर रहते हुए भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम किया।

इससे पहले भी वह कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग में राजनीतिक विंग के प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके थे।

श्रीलंका में उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कई पहल की गईं।

2024 में राजनीति में भी रखा कदम

राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद तरनजीत सिंह संधू ने सक्रिय राजनीति में भी कदम रखा। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की अमृतसर सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

हालांकि इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिल सकी, लेकिन राजनीति में उनकी एंट्री ने काफी चर्चा बटोरी थी।

दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में होगी अहम भूमिका

अब दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में तरनजीत सिंह संधू की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिल्ली का प्रशासनिक ढांचा केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच समन्वय पर आधारित होता है।

ऐसे में उनके लंबे प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव को राजधानी के प्रशासन में उपयोगी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर संवाद और समन्वय की संभावना बढ़ सकती है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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