BSF कांस्टेबल भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 50% आरक्षण, आयु सीमा और शारीरिक परीक्षण में भी छूट

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Javed Haider Zaidi

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BSF constable recruitment for ex agniveers

नई दिल्ली: सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कांस्टेबल पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पूर्व अग्निवीरों को बड़ी राहत दी गई है। केंद्र सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब बीएसएफ कांस्टेबल भर्ती में आधी सीटें उन युवाओं के लिए आरक्षित रहेंगी, जिन्होंने अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा पूरी की है।

पहले 10%, अब 50% आरक्षण

अब तक बीएसएफ कांस्टेबल भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला आगामी भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू होगा।

आयु सीमा में छूट

नए नियमों के तहत पूर्व अग्निवीरों को आयु सीमा में भी राहत दी गई है।

  • पहले बैच के अग्निवीरों को 5 वर्ष तक की आयु छूट
  • बाद के बैचों के अग्निवीरों को 3 वर्ष की आयु छूट दी जाएगी

शारीरिक परीक्षा से राहत

अधिसूचना के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान

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से छूट दी जाएगी। हालांकि, लिखित परीक्षा और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं लागू रहेंगी।

भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में

बीएसएफ कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहले चरण में पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत पदों पर भर्ती की जाएगी।
दूसरे चरण में शेष पदों पर अन्य उम्मीदवारों की भर्ती स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) के माध्यम से की जाएगी।

अग्निपथ योजना से जुड़े युवाओं को अवसर

सरकार के इस निर्णय को अग्निपथ योजना से जुड़े युवाओं के लिए सेवा के बाद रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रशिक्षित और अनुभवी युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

अन्य बलों में भी लागू हो सकता है फैसला

गृह मंत्रालय के संकेतों के अनुसार, भविष्य में इसी तरह का आरक्षण मॉडल अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी लागू किया जा सकता है।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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