2019 हेट स्पीच केस में आज़म ख़ान बरी, रामपुर की MP-MLA कोर्ट से मिली बड़ी राहत

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Javed Haider Zaidi

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आजम खान को मिली बड़ी राहत (PHOTO:PTI)

लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए बयान के मामले में सबूत न मिलने पर अदालत ने आरोप खारिज किए, हालांकि अन्य मामलों में जेल में हैं आज़म ख़ान

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान को 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े हेट स्पीच मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। रामपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद आज़म ख़ान को दोषमुक्त (बरी) कर दिया।

यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा था, जिस पर आरोप लगाया गया था कि उससे समाज में तनाव फैल सकता है और सरकारी अधिकारियों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। पुलिस ने इसी आधार पर आज़म ख़ान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। गवाहों के बयान और उपलब्ध सबूत संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहे, जिसके चलते अदालत ने आज़म ख़ान को बरी करने का आदेश दिया।

हालांकि, इस फैसले के बावजूद आज़म ख़ान को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। वे डुअल पैन कार्ड फर्जीवाड़ा मामले में सजा काट रहे हैं, जिसमें उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा उनके खिलाफ कई अन्य मुकदमे अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं।

अदालत के फैसले के बाद आज़म ख़ान के समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताया, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को उनकी लंबी कानूनी लड़ाई में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भले ही सीमित राहत हो, लेकिन आने वाले मामलों में इसका असर पड़ सकता है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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