Lucknow: में क्रांतिकारी स्वास्थ्य सुविधा: गंभीर मरीजों के लिए एक ही ओटी में कई सुपर‑स्पेशलिटी सेवाएँ

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Javed Haider Zaidi

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आधुनिक अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर, जहां सर्जन और नर्स ब्लू स्क्रब्स में रोबोटिक उपकरण और मेडिकल मॉनिटर के साथ सर्जरी कर रहे हैं, उच्च तकनीक और पेशेवर सर्जिकल वातावरण दर्शाता हुआ

Lucknow के SGPGI में गंभीर मरीजों के लिए एक नई सुविधा शुरू होने जा रही है। अब मरीजों को अलग‑अलग विभागों में जाने की बजाय एक ही ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में कई सुपर‑स्पेशलिटी सेवाएँ उपलब्ध होंगी। यह कदम उत्तर भारत में अस्पतालों की सुविधाओं को और अधिक मरीज‑सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

मुख्य उद्देश्य और लाभ:
इस परियोजना का मकसद जटिल बीमारियों वाले मरीजों को सभी जरूरी विशेषज्ञ सेवाएँ एक छत के नीचे उपलब्ध कराना है। उदाहरण के लिए, किडनी ट्रांसप्लांट और हृदय संबंधित उपचार एक ही स्थान पर होंगे। इससे मरीज का समय बचेगा, जीवन रक्षक सेवाएँ तेजी से मिलेंगी और अस्पताल का संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित होगा।

नई तकनीक और नवाचार:
इस सुविधा में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा। डिजिटल और स्मार्ट तकनीकें मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाले इलाज के साथ आपातकालीन निर्णय समर्थन भी प्रदान करेंगी।

मरीजों के लिए अतिरिक्त सुविधाएँ:
नए ओटी केंद्र में टेलीमेडिसिन, डिजिटल कंसल्टेशन, और आपातकालीन सपोर्ट सिस्टम जैसी सुविधाएँ भी दी जाएंगी। इससे न सिर्फ लखनऊ, बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी लाभ होगा।

भविष्य की दिशा:
यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से अगले पांच वर्षों में पूरी होगी। अस्पताल स्टाफ को अतिरिक्त प्रशिक्षण और सुरक्षा मानक का पालन भी सुनिश्चित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से लखनऊ का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत, आधुनिक और मरीज-केंद्रित बन जाएगा।

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निष्कर्ष:
इस नई पहल से लखनऊ में गंभीर मरीजों के लिए सुपर‑स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का नया मापदंड स्थापित होगा। यह कदम मरीजों की सुविधा, समय की बचत और जीवन रक्षक सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमला, UN से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

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इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमले पर मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान, पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वीडियो संदेश

मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित शिया मस्जिद खदीजतुल कुबरा में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नमाज़ अदा कर रहे मासूम नमाज़ियों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कई लोगों की शहादत की खबर है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

इस दर्दनाक घटना पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास (Yasoob Abbas) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हमले को इंसानियत और इस्लाम दोनों के खिलाफ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

“आतंकियों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं” — मौलाना यासूब अब्बास

मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में कहा कि जो लोग खुद को मुसलमान बताकर मस्जिदों में नमाज़ियों पर गोलियां बरसाते हैं, वे दरअसल इस्लाम के नाम पर छिपे हुए वहशी दरिंदे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम किसी भी निर्दोष की हत्या की इजाज़त नहीं देता और ऐसे कृत्य करने वालों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी आतंकवाद को और बढ़ावा दे रही है।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

AISPLB के महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती से लगातार आतंकवाद पनप रहा है और वहां अल्पसंख्यकों, खासकर शिया मुसलमानों की जान सुरक्षित नहीं है।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय मंच अब भी सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे हमले भविष्य में और भयावह रूप ले सकते हैं।

शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना

अपने बयान के अंत में मौलाना यासूब अब्बास ने हमले में शहीद हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से दुआ करते हैं कि शहीदों के परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की ताकत मिले और घायलों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ हो।

मानवता पर हमला, पूरी दुनिया के लिए चेतावनी

इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुआ यह आतंकी हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता और धार्मिक सह-अस्तित्व पर हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया, तो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक आतंकवाद और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।

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