हरियाणा विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा: CM सैनी का हुड्डा पर बड़ा तंज—”अविश्वास प्रस्ताव लाए पर खुद दस्तखत करना भूल गए?”

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Javed Haider Zaidi

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हरियाणा विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा | फोटो क्रेडिट: आजतक

दोस्त बने थे दुश्मन: विधानसभा में दिखा अजब नजारा, सुबह हुआ स्वागत और दोपहर में आया अविश्वास प्रस्ताव; 2 घंटे की चर्चा में छिड़ा शब्दों का बाण।

चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में शुक्रवार का दिन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा। कल तक जिस सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ‘दोस्ताना’ माहौल दिख रहा था, आज वहां अविश्वास की गहरी खाई नजर आई। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने मंजूर कर लिया है।

“हुड्डा साहब, चश्मा साफ करके देखा पर आपके साइन नहीं मिले!”

सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर जबरदस्त पलटवार किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कल उन्होंने बड़े दिल से भूपेंद्र सिंह हुड्डा का स्वागत किया था, लेकिन कुछ ही घंटों में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ले आया। सैनी ने तंज कसते हुए कहा, “मैंने प्रस्ताव की कॉपी मंगवाई, चश्मा साफ करके दो बार देखा, लेकिन उस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के हस्ताक्षर ही गायब थे। ऐसा लगता है या तो हुड्डा साहब खुद को नेता नहीं मान रहे या पार्टी में कुछ और ही चल रहा है।”

कांग्रेस का पलटवार: “ये सरकार जनता का भरोसा खो चुकी है”

वहीं, कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य विधायकों ने सरकार पर ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया। हुड्डा ने कहा कि यह सरकार अनैतिक तरीके से बनी है और इसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस ने बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव सिर्फ सदन का नहीं, बल्कि हरियाणा की जनता की आवाज है।

सदन का गणित: क्या सुरक्षित है सैनी सरकार?

90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 46 है। वर्तमान में स्थिति कुछ इस प्रकार है:

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  • BJP: 48 विधायक
  • Congress: 37 विधायक
  • अन्य: 5 विधायक

आंकड़ों के लिहाज से नायब सिंह सैनी की सरकार सुरक्षित दिख रही है, लेकिन कांग्रेस का लक्ष्य इस प्रस्ताव के जरिए सरकार की ‘कमियों’ को जनता के सामने बेनकाब करना है। स्पीकर ने इस पूरी चर्चा के लिए 2 घंटे का समय तय किया है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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