सिक्किम में फिर भूकंप के झटके, 4.1 तीव्रता से हिली धरती
देश के पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। शनिवार रात करीब 8 बजकर 41 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र मंगन जिले में जमीन से लगभग 14 किलोमीटर नीचे था।
हालांकि इस भूकंप में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन झटकों के बाद लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
दो दिन में कई बार हिली धरती, लोगों में बढ़ी चिंता
सिक्किम में यह पहला झटका नहीं है। इससे पहले शुक्रवार तड़के भी लगातार दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। राजधानी गंगटोक में आए इन झटकों की तीव्रता क्रमशः 3.6 और 2.7 मापी गई थी।
पहला भूकंप सुबह 4:26 बजे गंगटोक से करीब 10.7 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 5 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया था। वहीं दूसरा झटका 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। इन झटकों से भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन लगातार आ रहे भूकंपों ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
क्यों आते हैं भूकंप? समझिए वैज्ञानिक कारण
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे होने वाली प्राकृतिक हलचलों का परिणाम है। धरती के भीतर सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या इनके बीच घर्षण होता है, तब ऊर्जा निकलती है और भूकंप आता है।
भारत में भूकंप का सबसे बड़ा कारण भारतीय प्लेट का यूरेशियन प्लेट से टकराना है। यही वजह है कि हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत में भूकंप का खतरा ज्यादा बना रहता है।
भारत के भूकंप जोन: कितना संवेदनशील है आपका इलाका
भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। देश को चार सिस्मिक जोन में बांटा गया है:
- जोन-2: कम जोखिम वाला क्षेत्र
- जोन-3: मध्यम जोखिम
- जोन-4: उच्च जोखिम
- जोन-5: अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र
सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत का बड़ा हिस्सा जोन-5 में आता है, जो सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। वहीं दिल्ली जोन-4 में स्थित है, जहां भी बड़े भूकंप की आशंका बनी रहती है।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का असर
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है और इसका प्रभाव तीव्रता के अनुसार बदलता है:
- 4.0–4.9: हल्के झटके, सामान गिर सकता है
- 5.0–5.9: फर्नीचर हिल सकता है
- 6.0–6.9: इमारतों में दरारें आ सकती हैं
- 7.0–7.9: इमारतें गिरने लगती हैं
- 8.0 से ऊपर: भारी तबाही और सुनामी का खतरा
- 9.0+: विनाशकारी स्तर का भूकंप
विशेषज्ञों की सलाह: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
लगातार आ रहे झटकों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की बजाय सतर्क रहना जरूरी है। भूकंप के दौरान खुले स्थान पर जाना, मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे छिपना और लिफ्ट का इस्तेमाल न करना जैसे बुनियादी नियम जान बचा सकते हैं।