लखनऊ में हैवान बना पिता: 4 साल के बेटे की बेरहमी से हत्या, शरीर पर 18 चोट के निशान; सौतेली मां भी आरोपी

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Javed Haider Zaidi

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लखनऊ के चौक में 4 साल के मासूम अर्णव की हत्या मामले में पुलिस जांच, पिता और सौतेली मां पर आरोप

जिस पिता के कंधों पर बच्चे का भविष्य सुरक्षित माना जाता है, वही अगर उसकी जान का दुश्मन बन जाए तो यह इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला सच बन जाता है। राजधानी लखनऊ से ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कलयुगी पिता पर अपने ही चार साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या करने का आरोप लगा है। इस दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

मामला लखनऊ के चौक इलाके का है, जहां चार साल के मासूम अर्णव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआत में इसे सामान्य मौत माना जा रहा था, लेकिन जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई तो सच्चाई ने सबको स्तब्ध कर दिया। रिपोर्ट में बच्चे के शरीर पर 18 गंभीर चोटों के निशान पाए गए। कई जगह गहरी चोटें थीं, कुछ हड्डियां टूटी हुई थीं और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि भी हुई।

कोर्ट से कस्टडी लेकर पिता के पास गया था बच्चा

बताया जा रहा है कि अर्णव की मां की पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके बाद से वह अपनी नानी के घर रह रहा था और वहीं उसका पालन-पोषण हो रहा था। परिवार के लोगों के मुताबिक बच्चा वहां सुरक्षित और खुश था।

इसी बीच बच्चे के पिता भीष्म खरबंदा ने कोर्ट में यह कहते हुए कस्टडी की मांग की कि वह अपने बेटे की बेहतर परवरिश करना चाहता है। अदालत से कस्टडी मिलने के बाद अर्णव को पिता अपने साथ ले गया। लेकिन ननिहाल पक्ष का आरोप है कि पिता के पास जाने के बाद से ही अर्णव की जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

सौतेली मां पर भी गंभीर आरोप

ननिहाल पक्ष ने बच्चे के पिता भीष्म खरबंदा और उसकी दूसरी पत्नी रागिनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि सौतेली मां बच्चे के साथ अक्सर मारपीट करती थी और उसे प्रताड़ित करती थी।

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ननिहाल के लोगों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जब भी वे बच्चे से बात करने की कोशिश करते थे, तो पिता वीडियो कॉल कर देता था लेकिन बातचीत नहीं करने देता था। वीडियो कॉल में भी आवाज म्यूट कर दी जाती थी और सिर्फ बैक कैमरे से बच्चे को दिखाया जाता था।

परिवार का यह भी कहना है कि अर्णव पहले बेहद चंचल और खुशमिजाज बच्चा था, लेकिन पिता के पास जाने के बाद वह पूरी तरह चुप और डरा हुआ रहने लगा था।

चोट के निशान छिपाने के लिए पहनाए जाते थे फुल स्लीव कपड़े

ननिहाल पक्ष ने आरोप लगाया है कि बच्चे के शरीर पर पड़े चोट के निशानों को छिपाने के लिए पिता उसे गर्मियों में भी फुल स्लीव के कपड़े पहनाकर रखता था। कई बार जब परिवार वालों ने इन निशानों के बारे में पूछताछ की तो सौतेली मां रागिनी हर बार अलग-अलग बहाने बना देती थी।

परिवार का दावा है कि उन्हें पहले से ही बच्चे के साथ हो रहे अत्याचार का शक था, लेकिन उन्हें उससे खुलकर मिलने या बात करने का मौका नहीं दिया जाता था।

बाथरूम में मिला मासूम का शव

घटना के दिन अर्णव का शव घर के बाथरूम में मिला। शुरू में इसे दुर्घटना बताने की कोशिश की गई, लेकिन जब मामला पुलिस तक पहुंचा और पोस्टमॉर्टम कराया गया तो सच्चाई सामने आ गई।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि निर्मम हत्या का मामला है।

पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस

मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने पिता भीष्म खरबंदा और सौतेली मां रागिनी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना

चार साल के मासूम अर्णव की इस दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते और प्यार-दुलार के बीच बड़े होते हैं, उस उम्र में अर्णव को कथित तौर पर बेरहमी और हिंसा का सामना करना पड़ा।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर एक मासूम बच्चे के साथ इतनी क्रूरता कैसे हो सकती है।

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भर्ती परीक्षाओं में जाति-धर्म पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी का सख्त निर्देश, पेपर सेटर्स पर होगी कड़ी निगरानी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भर्ती बोर्डों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म या संप्रदाय पर अमर्यादित टिप्पणी न करने का निर्देश देते हुए।

भर्ती परीक्षाओं में विवादित सवालों पर सख्ती, सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्देश केवल भर्ती बोर्डों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सभी पेपर सेटर्स तक सख्ती से पहुंचाया जाए और उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे हैबिचुअल ऑफेंडर मानते हुए तुरंत प्रतिबंधित किया जाए।

पेपर सेटर्स के एमओयू में भी शामिल होगा नियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ होने वाले समझौतों यानी एमओयू में भी इस नियम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवालों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

विवादित प्रश्नों से उपजा था आक्रोश

दरअसल हाल के समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में पूछे गए कुछ सवालों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

हाल ही में आयोजित यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े एक विकल्प को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर भी निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बदलते मौसम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी वर्षा को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फील्ड में जाकर फसलों को हुए संभावित नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कराएं।

किसानों को समय पर मिले मुआवजा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है तो उसका आकलन समय पर किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े और राहत राशि समय पर उनके खाते में पहुंच सके।

परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में सवालों की भाषा और विषयवस्तु बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें तैयार करते समय सामाजिक सौहार्द और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब भर्ती बोर्डों को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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