अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद लोकसभा में लौटे स्पीकर ओम बिरला
लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज होने के बाद गुरुवार को स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) दोबारा सदन में लौट आए। पिछले कुछ दिनों से वह सदन की कार्यवाही से दूर थे, क्योंकि उनके खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव के खारिज होने के बाद उन्होंने सदन में वापसी की और सभी सदस्यों को संबोधित करते हुए संसदीय मर्यादा और नियमों के पालन पर जोर दिया।
सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संसद की गरिमा और नियमों का सम्मान है। इसलिए किसी भी सदस्य को नियमों और प्रक्रियाओं से ऊपर जाकर बोलने का विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता।
संसदीय इतिहास का दिया हवाला
स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार है जब लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन का हर सदस्य नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं के भीतर रहते हुए अपनी बात रख सके। उनके मुताबिक लोकसभा केवल राजनीतिक बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अनुशासन का भी प्रतीक है।
आरोपों को किया खारिज
सदन में लौटने के बाद ओम बिरला ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी तथ्यों के आधार पर खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्होंने हमेशा निष्पक्षता के साथ सदन की कार्यवाही को संचालित करने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे सदन का होता है। इसलिए इस पद पर बैठा व्यक्ति हर सदस्य के अधिकारों की रक्षा करने और सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है।
सभी दलों से सहयोग की अपील
अपने संबोधन के अंत में स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों के सांसदों से सहयोग की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का सहयोग जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि संसद में बहस और विरोध दोनों ही संसदीय नियमों और मर्यादाओं के दायरे में रहें।
लोकसभा में उनकी वापसी के साथ ही यह संकेत भी मिला कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुसार चलाने पर और अधिक सख्ती दिखाई जा सकती है।