मिडिल ईस्ट संकट का असर: 7-8 रुपये वाला अंडा 3.5 रुपये में बेचने को मजबूर किसान, नमक्कल के पोल्ट्री सेक्टर पर मंडराया बड़ा संकट

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Javed Haider Zaidi

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मिडिल ईस्ट संकट के कारण तमिलनाडु के नमक्कल में अंडों की कीमत गिरने से नुकसान झेलते पोल्ट्री किसान

भारत के प्रमुख अंडा उत्पादन केंद्रों में शामिल तमिलनाडु का नमक्कल इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ‘एग सिटी’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस इलाके के पोल्ट्री किसान अंडों की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण नुकसान में अंडे बेचने को मजबूर हो गए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि जो अंडे सामान्य तौर पर 7 से 8 रुपये तक बिकते थे, वे अब करीब 3.5 रुपये प्रति अंडा के भाव पर बाजार में बेचे जा रहे हैं।

इस संकट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने भारत से खाड़ी देशों को होने वाले अंडों के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक 28 फरवरी को करीब 70 कंटेनरों में लोड होकर लगभग 3.5 करोड़ अंडे संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी देशों के लिए रवाना किए गए थे। लेकिन लाल सागर और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण ये जहाज बीच रास्ते में ही फंस गए हैं।

बताया जा रहा है कि हर कंटेनर में करीब पांच लाख अंडे लोड थे और एक अंडे की औसत कीमत लगभग 4.80 रुपये आंकी गई थी। इस हिसाब से करीब 16 से 17 करोड़ रुपये का माल दांव पर लगा हुआ है। इसके अलावा कंटेनरों के किराए और ईंधन पर आने वाला अतिरिक्त खर्च भी एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है।

नमक्कल भारत के कुल अंडा निर्यात का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यहां से बड़ी मात्रा में अंडे ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को भेजे जाते हैं। लेकिन निर्यात रुकने के कारण अब वही अंडे घरेलू बाजार में जमा होने लगे हैं। नमक्कल में रोजाना करीब 6 से 7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है और जब विदेश भेजे जाने वाले अंडे भी स्थानीय बाजार में आने लगे तो अचानक सप्लाई बहुत ज्यादा बढ़ गई।

अंडों की शेल्फ लाइफ सीमित होती है और तापमान बढ़ने के साथ इनके जल्दी खराब होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में किसानों के पास इन्हें लंबे समय तक स्टॉक में रखने का विकल्प नहीं होता। मजबूरी में वे कम कीमत पर अंडे बेचने को तैयार हो जाते हैं, ताकि कम से कम कुछ नुकसान कम किया जा सके।

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पोल्ट्री किसानों के अनुसार एक अंडे की उत्पादन लागत करीब 4.5 से 5 रुपये के बीच बैठती है, जिसमें फीड, बिजली, दवाइयों और अन्य संचालन खर्च शामिल हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति में अंडे करीब 3.50 रुपये प्रति पीस के भाव पर बिक रहे हैं। यानी हर अंडे पर किसानों को करीब 1.50 रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एग एंड पोल्ट्री प्रोडक्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव जहान आर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनी अनिश्चितता के कारण पिछले सप्ताह फार्मगेट कीमतों में लगभग 50 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि नमक्कल क्षेत्र में रोजाना करीब सात करोड़ अंडों का उत्पादन होता है। यदि हर अंडे पर औसतन 1.50 रुपये का नुकसान हो रहा है, तो पोल्ट्री सेक्टर को प्रतिदिन लगभग 10.5 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्यात की स्थिति सामान्य नहीं हुई तो छोटे और मध्यम स्तर के कई पोल्ट्री फार्म आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। कई यूनिट्स के बंद होने की आशंका भी जताई जा रही है।

इस बीच एक्सपोर्टर्स संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों तक अंडे पहुंचाने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश कर रहे हैं। इसके लिए शिपिंग कंपनियों से बातचीत भी जारी है, लेकिन मौजूदा हालात में अधिकांश शिपिंग लाइनें जोखिम लेने से हिचकिचा रही हैं। जब तक सुरक्षित और स्थिर मार्ग उपलब्ध नहीं होता, तब तक नमक्कल के पोल्ट्री किसानों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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