संसद में आज टकराव के आसार: स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव, ईरान मुद्दे पर बोलेंगे एस. जयशंकर

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संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही, स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव और ईरान मुद्दे पर चर्चा की संभावना।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज सोमवार से शुरू हो गया है और पहले ही दिन सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। इस चरण में जहां कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा होनी है, वहीं लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर भी सियासी माहौल गरम रहने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस के आधार पर इस प्रस्ताव को सदन के एजेंडे में शामिल किया गया है। यदि यह प्रस्ताव सदन में लाया जाता है तो उस पर विस्तृत चर्चा भी हो सकती है। इसी को देखते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है, ताकि महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

9 मार्च से शुरू हुआ बजट सत्र का दूसरा चरण

संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाता है। इस वर्ष बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से शुरू हुआ था और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया गया था। पहला चरण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समाप्त होने के बाद अब दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा।

इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्पीकर ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से औपचारिक नोटिस दिया गया है। यह नोटिस कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और डॉ. मल्लू रवि ने दिया है।

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विपक्ष का कहना है कि सदन के संचालन को लेकर उनके कई सवाल हैं और इसी वजह से यह प्रस्ताव लाया गया है। अगर सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा होती है तो यह संसद के लिए एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जाएगा।

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष इस प्रस्ताव को विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रहा है। यही वजह है कि भाजपा ने 9 और 10 मार्च के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, ताकि इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।

ईरान और पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार का बयान

संसद के दूसरे चरण में विदेश नीति से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज सदन में ईरान और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर सरकार का रुख स्पष्ट कर सकते हैं।

हाल के दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्र में जारी संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। ऐसे में भारत की विदेश नीति और इस पूरे मामले में उसकी कूटनीतिक स्थिति को लेकर भी संसद में सवाल उठने की संभावना है।

विदेश मंत्री जयशंकर से उम्मीद की जा रही है कि वे भारत की आधिकारिक स्थिति और क्षेत्र में शांति बनाए रखने को लेकर देश की नीति पर विस्तार से जानकारी देंगे।

कई अहम विधायी कार्य भी एजेंडे में

बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार की ओर से कई विधेयकों को पारित कराने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, बजट आवंटन और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार संसद का दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि इसमें घरेलू राजनीति के साथ-साथ विदेश नीति और आर्थिक मुद्दों पर भी व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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