बिहार के हाजीपुर के रहने वाले उज्जवल प्रियांक ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और राज्य का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता की खबर सामने आते ही पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोगों का उनके घर पर बधाई देने का सिलसिला लगातार जारी है।
उज्जवल की इस उपलब्धि के पीछे उनकी वर्षों की मेहनत, अनुशासन और बचपन से देखा गया सपना है। खास बात यह है कि उन्होंने इस मुकाम को पाने के लिए ज्यादातर तैयारी घर पर रहकर सेल्फ स्टडी के जरिए की।
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
उज्जवल प्रियांक ने वर्ष 2023 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। लगातार प्रयास और मेहनत के बाद उन्होंने तीसरे प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया टॉप 10 में जगह बनाकर एक नया रिकॉर्ड भी कायम किया।
उनके पिता संजीव सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उज्जवल शुरू से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रहे हैं। बचपन से ही उनमें प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा थी और वही सपना आज उनकी सफलता की वजह बना है।
सेल्फ स्टडी से बनाई मजबूत तैयारी
उज्जवल की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने ज्यादातर तैयारी खुद से पढ़ाई करके की। उनके पिता के मुताबिक, उज्जवल रोजाना करीब 5 से 6 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करते थे और अपने लक्ष्य को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे।
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज सेवा और लोगों की मदद करने में भी काफी रुचि थी। यही कारण है कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करना चाहते थे।
परिवार में खुशी का माहौल
जैसे ही यूपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और उज्जवल के 10वीं रैंक हासिल करने की खबर सामने आई, उनके घर में खुशी का माहौल बन गया। रिश्तेदार, दोस्त और आसपास के लोग लगातार उनके घर पहुंचकर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दे रहे हैं।
उज्जवल के पिता संजीव सिंह ने बताया कि रिजल्ट आने के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों से फोन और संदेश आ रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य इस सफलता से बेहद खुश हैं।
पटना से जयपुर तक की पढ़ाई
उज्जवल प्रियांक की शुरुआती पढ़ाई पटना में हुई। उन्होंने नर्सरी से लेकर दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पटना के राजधानी ज्ञान निकेतन स्कूल से की। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर चले गए, जहां से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया और वर्ष 2023 से पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम आज पूरे देश के सामने है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता
उज्जवल प्रियांक की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं। सीमित संसाधनों में भी लगातार मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
हाजीपुर के इस युवा की सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। अब उज्जवल प्रशासनिक सेवा के जरिए देश और समाज के विकास में योगदान देने के लिए तैयार हैं।