ईरान मुद्दे पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का बड़ा बयान: ‘दो पैसों के सामने घुटने न टेके भारत’, डोनाल्ड ट्रंप पर भी तीखी टिप्पणी

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Javed Haider Zaidi

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लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का बयान, अमेरिका और इजरायल की नीतियों की आलोचना करते हुए भारत से ईरान मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील।

लखनऊ से सामने आया सख्त बयान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने अंतरराष्ट्रीय हालात और ईरान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ताकतवर देशों के दबाव में खामोश दिखाई दे रहा है, जबकि सच के साथ खड़े होने की जरूरत है।

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में मौलाना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि दुनिया के कई देश उनके दबाव में झुकते नजर आ रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि दुख की बात यह है कि कई देशों ने खुलकर विरोध नहीं किया, जबकि घटनाओं को पूरी दुनिया देख रही है।

“दुनिया के ताकतवर देश खामोश”

मौलाना कल्बे जव्वाद के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक खामोशी छाई हुई है। उनका कहना था कि पहले पूरी दुनिया अमेरिका के प्रभाव में रहती थी, लेकिन उस समय भी ईरान खुलकर उसके खिलाफ खड़ा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम देशों ने भी अमेरिका को अपने यहां सैन्य ठिकाने देकर एक छोटे देश के खिलाफ कार्रवाई में मदद की।
उनके अनुसार, इस तरह की नीतियां क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही हैं।

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मौलाना ने यह भी कहा कि जब बड़े नेताओं को निशाना बनाया जाता है तो बातचीत के रास्ते अपने आप बंद हो जाते हैं। इसलिए सबसे पहले हमलों को रोकना जरूरी है, ताकि शांति की दिशा में कोई रास्ता निकल सके।

“भारत को सच्चाई के साथ खड़ा होना चाहिए”

भारत के रुख पर टिप्पणी करते हुए मौलाना ने कहा कि देश को न्याय और सच्चाई के साथ खड़ा होना चाहिए।

उनका कहना था कि किसी भी देश को सिर्फ आर्थिक हितों के आधार पर अपनी विदेश नीति तय नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा रुख अपनाना चाहिए जिसमें इंसाफ और संतुलन दिखाई दे।

मौलाना के अनुसार, ईरान की ओर से जो कार्रवाई हो रही है, वह इंसानों के खिलाफ नहीं बल्कि सैन्य ठिकानों के खिलाफ बताई जा रही है।

“अमेरिका और इजरायल सरेंडर करेंगे तभी हालात सुधरेंगे”

शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने रुख में बदलाव नहीं लाते, तब तक हालात सामान्य होना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल की नीतियों से हुई है और इसका समाधान भी तभी संभव है जब बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाया जाए।

मौलाना यासूब अब्बास ने यह भी कहा कि ईरान अपने नजरिए से इंसानियत के पक्ष में खड़ा होने का दावा कर रहा है और उसे भरोसा है कि उसका असली सहारा अल्लाह है।

भारत के रुख पर भी जताई नाराजगी

इसी मुद्दे पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने भी भारत की प्रतिक्रिया को निराशाजनक बताया।

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति और संतुलन की नीति की बात करता रहा है, लेकिन इस मामले में वह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

मौलाना सैफ अब्बास ने यह भी कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, लेकिन ईरान के प्रति सहानुभूति का कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि अटल जी की पहचान एक ऐसे नेता की थी जो हर मुद्दे पर इंसाफ और संतुलन की बात करते थे।

“ईरान का निशाना सैन्य ठिकाने”

मौलाना सैफ अब्बास ने यह भी कहा कि ईरान की कार्रवाई आम जनता के खिलाफ नहीं बल्कि अमेरिका के सैन्य ठिकानों के खिलाफ बताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय परिवार रहते हैं और वहां के हालात को देखते हुए भारत को संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।

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भर्ती परीक्षाओं में जाति-धर्म पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी का सख्त निर्देश, पेपर सेटर्स पर होगी कड़ी निगरानी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भर्ती बोर्डों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म या संप्रदाय पर अमर्यादित टिप्पणी न करने का निर्देश देते हुए।

भर्ती परीक्षाओं में विवादित सवालों पर सख्ती, सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्देश केवल भर्ती बोर्डों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सभी पेपर सेटर्स तक सख्ती से पहुंचाया जाए और उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे हैबिचुअल ऑफेंडर मानते हुए तुरंत प्रतिबंधित किया जाए।

पेपर सेटर्स के एमओयू में भी शामिल होगा नियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ होने वाले समझौतों यानी एमओयू में भी इस नियम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवालों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

विवादित प्रश्नों से उपजा था आक्रोश

दरअसल हाल के समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में पूछे गए कुछ सवालों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

हाल ही में आयोजित यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े एक विकल्प को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर भी निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बदलते मौसम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी वर्षा को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फील्ड में जाकर फसलों को हुए संभावित नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कराएं।

किसानों को समय पर मिले मुआवजा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है तो उसका आकलन समय पर किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े और राहत राशि समय पर उनके खाते में पहुंच सके।

परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में सवालों की भाषा और विषयवस्तु बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें तैयार करते समय सामाजिक सौहार्द और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब भर्ती बोर्डों को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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