नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों से बिहार की राजनीति में हलचल, अगले मुख्यमंत्री को लेकर BJP के इन 6 नेताओं के नाम चर्चा में

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Javed Haider Zaidi

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नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच बिहार में अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा के कई नेताओं के नाम चर्चा में

बिहार की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चाओं ने राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार गुरुवार, 6 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक Janata Dal (United) या Bharatiya Janata Party की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में संभावित नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नामांकन के दौरान बड़े नेताओं की मौजूदगी की चर्चा

सूत्रों का दावा है कि नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और बीजेपी से जुड़े कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रह सकते हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि राज्यसभा चुनाव और बिहार की राजनीति को लेकर एनडीए के भीतर बड़ा रणनीतिक फैसला लिया जा सकता है।

भाजपा से मुख्यमंत्री बनने की चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा चले जाते हैं तो सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री का पद भाजपा को दिया जा सकता है। साथ ही जेडीयू की ओर से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

इन संभावित उपमुख्यमंत्रियों में एक नाम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी चर्चा में है। हालांकि इसे लेकर भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी

बिहार में संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे प्रमुख नाम मौजूदा उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary का सामने आ रहा है। सम्राट चौधरी को पार्टी का मजबूत ओबीसी चेहरा माना जाता है और वे कोइरी (कुशवाहा) समुदाय से आते हैं। जातीय समीकरणों के लिहाज से उनका नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।

इन नेताओं के नाम भी चर्चा में

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई अन्य भाजपा नेताओं के नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Vijay Kumar Sinha – भूमिहार समुदाय से आते हैं और बिहार की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं।
  • Mangal Pandey – ब्राह्मण चेहरा, पार्टी में लंबे समय से सक्रिय और संगठन में मजबूत पकड़।
  • Nityanand Rai – यादव समुदाय से आते हैं और ओबीसी समीकरणों में अहम माने जाते हैं।
  • Sanjeev Chaurasia – भाजपा के सक्रिय विधायक और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • Pramod Chandravanshi – बिहार सरकार में मंत्री और सामाजिक समीकरणों में प्रभावशाली चेहरा।

इन सभी नामों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है, हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए की संयुक्त रणनीति पर निर्भर करेगा।

बिहार से अन्य नेताओं के नामांकन की भी तैयारी

सूत्रों के अनुसार बिहार से राज्यसभा चुनाव के लिए अन्य नेताओं के नामांकन की भी तैयारी है। इनमें Ramnath Thakur, Upendra Kushwaha और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Nitin Nabin के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।

क्या बदलेगा बिहार का सियासी समीकरण?

अगर नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार के हटने के बाद सत्ता का नया समीकरण बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में एनडीए की रणनीति और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

फिलहाल राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, लेकिन अंतिम तस्वीर राज्यसभा नामांकन और एनडीए की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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