राज्यसभा सीट पर MVA में असमंजस गहराया, शरद पवार के नाम पर सहमति नहीं; आज हो सकती है निर्णायक बैठक

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Javed Haider Zaidi

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महाविकास अघाड़ी में राज्यसभा सीट को लेकर असमंजस, शरद पवार की उम्मीदवारी पर अब तक सहमति नहीं; नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च, आज MVA नेताओं की अहम बैठक संभावित।

महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर चल रहा असमंजस अब खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख Sharad Pawar को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे और समर्थन की शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन सकी है।

नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च तय है, ऐसे में आज होने वाली संभावित बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में किसी भी सूरत में उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लेने की कोशिश की जाएगी, ताकि आखिरी वक्त में राजनीतिक नुकसान से बचा जा सके।

‘मातोश्री’ से निकला संदेश: बातचीत जारी, फैसला बाकी

गुरुवार को Supriya Sule ने ‘मातोश्री’ पहुंचकर शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख Uddhav Thackeray से मुलाकात की। इस मुलाकात को शरद पवार की उम्मीदवारी को लेकर समर्थन जुटाने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

बैठक के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही किसी सहमति की घोषणा हो सकती है। लेकिन कुछ ही समय बाद Aaditya Thackeray ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और चर्चा जारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान एक रणनीतिक संकेत था—शिवसेना (यूबीटी) अभी भी इस सीट पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है और आखिरी क्षण तक अपने विकल्प खुले रखना चाहती है।

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कांग्रेस की शर्त और गठबंधन की जटिलता

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने समर्थन के बदले विधान परिषद की एक सीट की मांग रखी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। यही वजह है कि MVA के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ गई है।

राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से यह सिर्फ एक सीट का सवाल नहीं है। यह गठबंधन की एकजुटता और नेतृत्व की सामूहिक रणनीति की परीक्षा भी बन गया है। अगर सहयोगी दलों के बीच समय रहते सहमति नहीं बनती है, तो इसका संदेश व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में जाएगा।

चुनाव कार्यक्रम और रिटायर होने वाले नेता

महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है। मतदान 16 मार्च को होगा और मतों की गिनती भी उसी दिन की जाएगी।

अप्रैल में जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शामिल हैं:

  • Sharad Pawar (राकांपा – शरद पवार गुट)
  • Priyanka Chaturvedi (शिवसेना – उद्धव गुट)
  • फौजिया खान (राकांपा – शरद पवार गुट)
  • Ramdas Athawale (आरपीआई – आठवले)
  • Bhagwat Karad (भाजपा)
  • Rajani Patil (कांग्रेस)
  • धैर्यशील पाटिल (राकांपा)

इन सीटों को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।

पवार की भूमिका और मौजूदा राजनीतिक संदर्भ

शरद पवार लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। हाल के महीनों में वे कई कारणों से चर्चा में रहे—पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम, परिवार से जुड़े राजनीतिक फैसले और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां। उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद समर्थकों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई थी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्यसभा की यह सीट सिर्फ संसदीय प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि अनुभव और नेतृत्व की निरंतरता का भी प्रतीक है। ऐसे में शरद पवार की उम्मीदवारी को लेकर MVA के भीतर मतभेद राजनीतिक महत्व रखते हैं।

MVA के सामने क्या हैं विकल्प?

  1. सर्वसम्मति से पवार के नाम पर मुहर: इससे गठबंधन एकजुटता का संदेश देगा।
  2. किसी अन्य सर्वमान्य चेहरे पर सहमति: इससे समझौते की राजनीति का संकेत जाएगा।
  3. मतभेद जारी रहना: ऐसी स्थिति में चुनावी रणनीति और विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ सकता है।

आज की संभावित बैठक को इसी लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। अगर आज भी सहमति नहीं बनती है, तो नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण राजनीतिक दबाव और बढ़ जाएगा।

निगाहें आज की बैठक पर

महाराष्ट्र की सियासत में राज्यसभा की यह सीट फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। MVA के भीतर जारी मंथन से यह साफ है कि हर दल अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत रखना चाहता है, लेकिन गठबंधन की मजबूती भी दांव पर है।

अब सबकी नजरें आज की बैठक पर टिकी हैं। आने वाले कुछ घंटों में यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या शरद पवार एक बार फिर उच्च सदन में अपनी पारी जारी रखेंगे या MVA कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने लाएगा।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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