NCERT की 8वीं की किताब में ‘न्यायपालिका को भ्रष्ट’ बताने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- यह गहरी साजिश हो सकती है

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Javed Haider Zaidi

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NCERT की 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका को लेकर विवादित सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दृश्य

देश की शीर्ष अदालत ने शैक्षणिक सामग्री में न्यायपालिका की छवि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। Supreme Court of India ने 8वीं कक्षा की एक पुस्तक में न्यायपालिका को भ्रष्टाचार से जोड़ने वाले अध्ययन पर कड़ा रुख अपनाया है और इसे संभावित “गहरी साजिश” करार दिया है।

मामला National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा प्रकाशित सोशल साइंस की किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ से जुड़ा है, जिसका पहला संस्करण फरवरी 2026 में जारी हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।

CJI की सख्त टिप्पणी: “यह एक कैलकुलेटेड मूव है”

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है, जिसके माध्यम से भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की सामग्री छात्रों तक पहुंचती है तो उसका दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

CJI ने टिप्पणी की कि लोकतंत्र के तीन स्तंभ—विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका—संवैधानिक सीमाओं के भीतर स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। ऐसे में किसी एक अंग की संस्थागत छवि को कमजोर करना लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार जैसा है।

“हजारों डिजिटल कॉपी हो सकती हैं”

पीठ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि डिजिटल युग में किसी भी किताब की हजारों प्रतियां ऑनलाइन प्रसारित हो सकती हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह जांचना आवश्यक है कि यह सामग्री कैसे और किन प्रक्रियाओं के तहत प्रकाशित हुई।

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बिना शर्त माफी, लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं

सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NCERT की ओर से पेश होते हुए बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा कि संबंधित अध्याय किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसे वापस ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 32 प्रतियां बाजार में गई थीं, जिन्हें वापस मंगाया गया है, और पूरी पुस्तक की समीक्षा की जाएगी।

हालांकि, CJI ने कहा कि मीडिया को भेजे गए संचार में माफी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने फिलहाल माफी स्वीकार करने से इंकार करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि आगे की जांच के बाद ही यह तय होगा कि माफी वास्तविक और पर्याप्त है या नहीं।

“हम केस बंद नहीं करेंगे”

CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले को यहीं समाप्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह जानना संस्थागत जिम्मेदारी है कि ऐसी सामग्री कैसे प्रकाशित हुई। अदालत ने गहरी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि जिन दो व्यक्तियों ने संबंधित अध्याय तैयार किए हैं, वे भविष्य में UGC या किसी मंत्रालय के साथ कार्य नहीं करेंगे।

सभी प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाने का आदेश

अदालत ने NCERT को निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर पुस्तक की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी सार्वजनिक पहुंच से तुरंत हटाई जाएं। रिटेल दुकानों, स्कूलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म—सभी जगह से इसे हटाने का आदेश दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि पुस्तक के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यदि किसी भी रूप में इस पुस्तक का वितरण किया गया तो उसे अदालत की अवमानना माना जाएगा।

दो हफ्ते में कम्प्लायंस रिपोर्ट

अदालत ने NCERT के निदेशक को निर्देश दिया कि स्कूल परिसरों में भेजी गई सभी प्रतियां तुरंत जब्त की जाएं और इसकी विस्तृत कम्प्लायंस रिपोर्ट दाखिल की जाए। साथ ही, सभी राज्यों के शिक्षा विभागों के प्रधान सचिवों को भी निर्देश दिया गया है कि वे दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

विवाद की जड़ क्या है?

विवादित अध्याय में न्यायपालिका के खिलाफ सैकड़ों शिकायतों का उल्लेख किया गया था और एक पूर्व CJI के भाषण के कुछ अंशों को इस तरह प्रस्तुत किया गया था जिससे यह संकेत मिलता था कि न्यायपालिका ने स्वयं संस्थागत भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी को स्वीकार किया है। साथ ही, आम नागरिकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार के अनुभव का जिक्र भी शामिल था।

अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री अत्यंत लापरवाही से लिखी गई प्रतीत होती है और इसे तथ्यात्मक संतुलन तथा संस्थागत जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया।

व्यापक असर की आशंका

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि शैक्षणिक सामग्री की समीक्षा, प्रकाशन प्रक्रिया और जवाबदेही के बड़े प्रश्न खड़े करता है। अदालत का रुख संकेत देता है कि भविष्य में शैक्षणिक पाठ्यक्रम से जुड़े मामलों में भी संस्थागत छवि और संवैधानिक मर्यादा को प्राथमिकता दी जाएगी।

अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। अब निगाहें इस पर हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।

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PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

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"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
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