उद्योगपति Anil Ambani के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। ईडी ने मुंबई स्थित उनके आलीशान आवास को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
ईडी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनिल अंबानी और उनके समूह की कंपनियों के खिलाफ अब तक 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है।
हाईकोर्ट से भी लगा झटका
इस कार्रवाई से पहले Bombay High Court ने भी अनिल अंबानी को बड़ा झटका दिया था। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने दिसंबर 2025 में पारित एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अनिल अंबानी और Reliance Communications के बैंक खातों को “धोखाधड़ी” श्रेणी में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई थी।
खंडपीठ ने अपने फैसले में एकल पीठ के आदेश को अवैध और विकृत करार दिया। अनिल अंबानी के वकीलों ने अदालत से आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया ताकि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर दी।
बैंकों की अपील पर हुआ फैसला
यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों — Indian Overseas Bank, IDBI Bank और Bank of Baroda — से जुड़ा है। इन बैंकों ने एकल पीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी।
बैंकों का कहना है कि जिन ‘फोरेंसिक ऑडिट’ के आधार पर खातों को धोखाधड़ी श्रेणी में रखा गया, वह पूरी तरह वैध है और उसमें धन की हेराफेरी और दुरुपयोग के गंभीर संकेत सामने आए हैं। यह रिपोर्ट लेखा परामर्श कंपनी BDO India LLP द्वारा तैयार की गई थी।
क्या है पूरा विवाद?
अनिल अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इन बैंकों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को “धोखाधड़ी खाता” घोषित करने का प्रस्ताव था।
एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि बैंकों की कार्रवाई तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण फोरेंसिक ऑडिट पर आधारित है और यह भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। हालांकि, खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और बैंकों की अपील मंजूर करते हुए अंतरिम राहत को रद्द कर दिया।
आगे क्या?
अब अनिल अंबानी के सामने कानूनी लड़ाई और तेज होने के संकेत हैं। ईडी की अटैचमेंट कार्रवाई और हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक जा सकता है।
वित्तीय अनियमितताओं के इस बड़े मामले पर बाजार और निवेशकों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और न्यायालयों के फैसले इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।