केरल का नाम अब ‘केरलम’: शशि थरूर ने उठाया Keralite और Keralan शब्दों का सवाल

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Javed Haider Zaidi

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर केरलम किया, शशि थरूर ने Keralite और Keralan शब्दों पर भाषाई सवाल उठाया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह राज्य के लोगों की इच्छा का सम्मान है और उनकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा।

इस निर्णय के बाद अब राजनीतिक और भाषाई बहसें भी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इस फैसले की सराहना की, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया। थरूर ने कहा, “सब कुछ अच्छा है, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमारे एंग्लोफोन्स के लिए एक छोटा सा भाषाई सवाल है – अब नए ‘केरलम’ के निवासियों के लिए ‘Keralite’ और ‘Keralan’ शब्दों का क्या होगा? ‘केरलमाइट’ एक सूक्ष्म जीव (microbe) की तरह लगता है और ‘केरलमियन’ भी कुछ अजीब और दुर्लभ अर्थ वाला शब्द प्रतीत होता है। शायद मुख्यमंत्री इस उत्साह को देखते हुए नए शब्दों के लिए प्रतियोगिता की घोषणा करें।”

आगे की प्रक्रिया

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद, राष्ट्रपति अब केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को राज्य विधानसभा में भेजेंगी। इसके पारित होने के बाद, संसद में विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही आधिकारिक रूप से राज्य का नाम ‘केरलम’ घोषित होगा।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “केरलम के लोगों को हार्दिक बधाई। मोदी जी के नेतृत्व में इस निर्णय से राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। ‘केरलम’ नाम राज्य की विरासत को उसकी पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शाएगा और गौरव बनाए रखेगा।”

वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, “केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का निर्णय राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है। यह औपनिवेशिक युग के अवशेषों से आगे बढ़ते हुए भारत की मूल परंपराओं और सभ्यता की जड़ों में गौरव बहाल करने का राष्ट्रीय संकल्प दर्शाता है। यह कदम ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना को मजबूत करता है।”

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इस तरह, केरल के नाम में बदलाव केवल एक आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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