शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली पर्व की तैयारियों के मद्देनजर जिला प्रशासन ने शहर की 92 मस्जिदों को त्रिपाल और पॉलिपैक से ढकने का बड़ा निर्णय लिया है। प्रशासन ने यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचाव के लिए उठाया है।
शाहजहांपुर में होली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम भी है, जिसमें विशेष जुलूस निकाले जाते हैं। विशेष रूप से लाट साहब का जुलूस पूरे शहर में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।
लाट साहब जुलूस: अनोखी परंपरा और उत्सव
शाहजहांपुर की होली अन्य जगहों से कुछ अलग है। यहां बड़े और छोटे लाट साहब का जुलूस आयोजित किया जाता है।
- बड़ा लाट साहब जुलूस: कोतवाली थाना क्षेत्र में निकाला जाता है।
- छोटा लाट साहब जुलूस: रामचन्द्र मिशन थाना क्षेत्र में आयोजित होता है।
इस जुलूस में लाट साहब को भैंसा गाड़ी पर बैठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है। जुलूस में शामिल लोग प्रतीकात्मक रूप से लाट साहब पर रंग डालते हैं और झाड़ू, जूतों एवं चप्पलों से उन्हें मारते हैं। यह परंपरा ऐतिहासिक रूप से अंग्रेजों के खिलाफ विरोध और स्थानीय संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है।
इस उत्सव में शामिल लोग रंगों और चप्पलों से सराबोर होकर उत्सव मनाते हैं और जुलूस के दौरान चीख-पुकार और हुरियारे सुनाई देते हैं। यह कार्यक्रम अपने अनोखे और पारंपरिक ढंग के कारण पूरे जनपद में प्रसिद्ध है।
प्रशासन की सुरक्षा पहल
जुलूस के मार्ग में आने वाली मस्जिदों और इबादतगाहों को रंग और किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इस वर्ष 92 मस्जिदों को त्रिपाल और पॉलिपैक से ढक दिया गया है।
जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और किसी भी तरह की अनुचित घटना से बचने के लिए अत्यंत जरूरी था।
इसके अलावा, जुलूस शुरू होने से लगभग 15 दिन पहले लाट साहब बनने वाले व्यक्ति का चयन किया जाता है और उसकी सभी तैयारियों की देखरेख की जाती है। लाट साहब को गाड़ी पर बैठाने से पहले हेलमेट पहनाया जाता है और जुलूस में शामिल लोग उसे प्रतीकात्मक रूप से झाड़ू और जूतों से मारते हैं।
शाहजहांपुर की होली: परंपरा और स्थानीय संस्कृति
शाहजहांपुर की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।
- जुलूस में शामिल होने वाले लोग पूरी तरह रंग और हर्षोल्लास में डूब जाते हैं।
- यह परंपरा अंग्रेजों के खिलाफ विरोध और स्थानीय भावनाओं का प्रतीक भी मानी जाती है।
- प्रशासन और पुलिस द्वारा जुलूस के मार्ग का निरीक्षण और मस्जिदों को ढकने का कार्य सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाता है।
शाहजहांपुर की होली की यह परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि त्योहार न केवल उत्सवपूर्ण हो बल्कि सभी नागरिकों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा भी बनी रहे।