“मेरे हाथ से एक हत्या हुई…”: पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह का चौंकाने वाला कबूलनामा, छेड़छाड़ आरोप और विनेश फोगाट पर भी तीखे बयान

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Javed Haider Zaidi

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पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देते हुए दृश्य, जिसमें उन्होंने आत्मरक्षा में हत्या की बात स्वीकार की और अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दी।

गोंडा से पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष Brij Bhushan Sharan Singh (बृज भूषण शरण सिंह) ने एक एक्सक्लूसिव बातचीत में ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि उनके हाथों से एक हत्या हुई थी। साथ ही, उन्होंने अपने ऊपर लगे छेड़छाड़ के आरोपों और पहलवान विनेश फोगाट को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

यह इंटरव्यू ऐसे समय में सामने आया है जब वे पहले से ही कई गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

मेरे जीवन में सिर्फ एक बार ऐसा मौका आया

पूर्व सांसद ने कहा कि उनके जीवन में केवल एक बार ऐसा अवसर आया जब उन्हें गोली चलानी पड़ी। उनके मुताबिक, यह घटना तब हुई जब उनके सामने उनके एक करीबी मित्र को गोली मार दी गई थी।

उन्होंने बताया कि हमलावर ने इसके बाद उनकी ओर बंदूक तान दी। ऐसी स्थिति में उन्होंने आत्मरक्षा और अपने मित्र की हत्या का बदला लेने के उद्देश्य से गोली चलाई। उनके शब्दों में, “कह सकते हैं कि आत्मरक्षा में या दोस्त का बदला लेने के लिए मेरे हाथ से एक हत्या हुई।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में क्रॉस फायरिंग का केस बना था, जिसमें दोनों पक्षों के लोग मारे गए थे और अंततः मामला समाप्त हो गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस घटना को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है। उनका तर्क था कि यदि उनके मित्र या परिवार के किसी सदस्य को कोई मार देगा, तो वे चुप नहीं बैठ सकते।

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सजा और कानूनी स्थिति पर क्या बोले?

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में उन्हें सजा हुई थी, तो उन्होंने कहा कि क्रॉस फायरिंग का मामला बना था और दोनों तरफ से मौतें हुई थीं। उनके अनुसार, केस समाप्त हो चुका है।

हालांकि, इस बयान के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस घटना का पूरा कानूनी रिकॉर्ड क्या रहा और न्यायिक प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई। फिलहाल, उन्होंने अपनी ओर से इसे एक आत्मरक्षात्मक कार्रवाई बताया है।

छेड़छाड़ के आरोपों पर दिया जवाब

पूर्व सांसद पर महिला पहलवानों ने गंभीर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस विषय पर उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज किया।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आरोप लगाए थे, वे अब अदालत में गवाही देने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं। उनका दावा है कि जिन तारीखों का जिक्र आरोपों में किया गया है, उस समय वे देश से बाहर सर्बिया में थे या फिर लखनऊ में मीडिया के साथ ऑन कैमरा मौजूद थे।

उन्होंने यह भी कहा कि एक आरोप में उन पर रात 11 बजे छेड़छाड़ करने और उसी रात विदेश जाकर दोबारा ऐसा करने का आरोप लगाया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह असंभव बताया।

मानहानि का केस न करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक मूल केस लंबित है, तब तक मानहानि का मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उन्हें अपने बरी होने का भरोसा है।

विनेश फोगाट पर तीखी टिप्पणी

पहलवान विनेश फोगाट को लेकर भी उन्होंने तीखा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ था।

उनका कहना है कि विनेश का वजन निर्धारित सीमा से लगभग 2 किलो अधिक था और उन्होंने एक ही दिन में 50 किलो और 53 किलो वेट कैटेगरी में ट्रायल दिया, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि खेल अधिकारियों ने दबाव और कथित ब्लैकमेल के चलते उन्हें दो ट्रायल देने की अनुमति दी।

पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि 50 किलो वर्ग में हारने के बाद 53 किलो में ट्रायल देकर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उनके मुताबिक, “जिस तरह से प्रक्रिया हुई, उसका परिणाम बाद में सामने आया।”

इन आरोपों पर विनेश फोगाट या संबंधित अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे बृज भूषण शरण सिंह का यह कबूलनामा कई स्तरों पर असर डाल सकता है। एक ओर जहां उन्होंने हत्या को आत्मरक्षा बताया है, वहीं दूसरी ओर छेड़छाड़ के आरोपों और खेल जगत के विवादों को लेकर उनका आक्रामक रुख साफ नजर आया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब खेल प्रशासन, महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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