लखनऊ में दिल दहला देने वाला हिट एंड रन: 1 किमी तक बोनट पर लटका रहा युवक, ड्राइवर फरार, अस्पताल में तोड़ा दम

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Javed Haider Zaidi

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रात के समय शहर की सड़क पर तेज रफ्तार कार के बोनट से लटका एक युवक, पीछे धुंधली स्ट्रीट लाइट्स और भागती गाड़ी का दृश्य, हिट एंड रन घटना को दर्शाता हुआ।

लखनऊ में रफ्तार का कहर, इंसानियत हुई शर्मसार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर में हाल ही में हुए चर्चित हिट एंड रन मामले के बीच अब लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में भी एक खौफनाक वारदात ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

18 फरवरी की रात एक तेज रफ्तार कार ने न सिर्फ एक युवक को टक्कर मारी, बल्कि उसे करीब एक किलोमीटर तक कार के बोनट पर लटकाए रखा। घायल युवक ने ड्राइवर से कार रोकने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि चालक ने गाड़ी की रफ्तार और बढ़ा दी। अंततः युवक संतुलन खोकर सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।

क्या है पूरा मामला?

मृतक की पहचान विमल पाल (32) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बदायूं जिले के निजामपुर का रहने वाला था और लखनऊ के कृष्णानगर में परिवार के साथ रह रहा था। वह पराग चौराहे के पास लैया-चना का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता था।

बताया गया है कि बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे वह अपना ठेला समेटकर घर लौट रहा था। घर से कुछ दूरी पहले एक तेज रफ्तार वैगनआर कार ने पीछे से उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमल उछलकर सीधे कार के बोनट पर जा गिरा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमल ने खुद को बचाने के लिए कार के वाइपर को पकड़ लिया और ड्राइवर से गाड़ी रोकने की गुहार लगाता रहा। लेकिन चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे करीब एक किलोमीटर तक दौड़ाया। लॉ कॉलेज गेट के सामने संतुलन बिगड़ने पर विमल कार के नीचे गिर गया। इसके बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया।

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अस्पताल में मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

स्थानीय लोगों ने घायल विमल को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पत्नी ममता और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

इंस्पेक्टर कृष्णानगर पीके सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश की जा रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

कानपुर के लैंबॉर्गिनी केस से तुलना

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल हिट एंड रन केस की चर्चा अभी थमी नहीं है। 8 फरवरी की रात कानपुर के पॉश इलाके ग्वालटोली की वीआईपी रोड पर कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ने तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से कई लोगों को टक्कर मार दी थी। उस हादसे में छह लोग घायल हुए थे और मामला सुर्खियों में बना हुआ है।

दोनों घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि रफ्तार और लापरवाही की कीमत आम नागरिक अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल

लगातार सामने आ रहे हिट एंड रन के मामलों ने आम लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या सड़क पर चलने वाले आम नागरिक की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या तेज रफ्तार और रसूख कानून से ऊपर हो गए हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा और त्वरित कार्रवाई ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है। साथ ही, ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन और निगरानी की जरूरत भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

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भर्ती परीक्षाओं में जाति-धर्म पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी का सख्त निर्देश, पेपर सेटर्स पर होगी कड़ी निगरानी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भर्ती बोर्डों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म या संप्रदाय पर अमर्यादित टिप्पणी न करने का निर्देश देते हुए।

भर्ती परीक्षाओं में विवादित सवालों पर सख्ती, सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्देश केवल भर्ती बोर्डों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सभी पेपर सेटर्स तक सख्ती से पहुंचाया जाए और उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे हैबिचुअल ऑफेंडर मानते हुए तुरंत प्रतिबंधित किया जाए।

पेपर सेटर्स के एमओयू में भी शामिल होगा नियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ होने वाले समझौतों यानी एमओयू में भी इस नियम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवालों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

विवादित प्रश्नों से उपजा था आक्रोश

दरअसल हाल के समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में पूछे गए कुछ सवालों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

हाल ही में आयोजित यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े एक विकल्प को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर भी निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बदलते मौसम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी वर्षा को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फील्ड में जाकर फसलों को हुए संभावित नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कराएं।

किसानों को समय पर मिले मुआवजा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है तो उसका आकलन समय पर किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े और राहत राशि समय पर उनके खाते में पहुंच सके।

परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में सवालों की भाषा और विषयवस्तु बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें तैयार करते समय सामाजिक सौहार्द और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब भर्ती बोर्डों को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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