नई दिल्ली: सड़क हादसों में समय पर इलाज न मिलने के कारण हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को ‘पीएम राहत योजना’ की शुरुआत की। यह योजना प्रधानमंत्री कार्यालय के ‘सेवा तीर्थ’ भवन में शिफ्ट होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला बड़ा निर्णय है। मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना सड़क हादसों में घायल लोगों को तत्काल और सुनिश्चित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं की वजह से बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। इनमें से अधिकांश मौतें समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण होती हैं। मंत्रालय ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि यदि हादसे का पीड़ित पहले घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती हो जाए, तो लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। इसे “गोल्डन ऑवर” माना जाता है, जो किसी भी आपातकालीन दुर्घटना में जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
पीएम राहत योजना की प्रमुख विशेषताएं
- योजना के तहत किसी भी सड़क हादसे का शिकार पात्र व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाएगा।
- यह सुविधा हादसे की तारीख से अगले 7 दिनों तक मान्य रहेगी।
- गंभीर हादसों के मामलों में प्राथमिक उपचार 48 घंटे तक और गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे तक उपलब्ध रहेगा।
- योजना के तहत लाभार्थी को अस्पताल में भर्ती कराने और इलाज सुनिश्चित कराने की प्रक्रिया पूरी तरह से कैशलेस होगी, जिससे किसी भी तरह की वित्तीय बाधा नहीं आएगी।
आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर
मंत्रालय ने कहा कि हादसे का शिकार व्यक्ति, राहगीर या घटना स्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल कर नजदीकी अस्पताल और एम्बुलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस कदम से पुलिस, इमरजेंसी टीम और अस्पतालों के बीच तेज़ और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, गंभीर हादसों की जानकारी तुरंत संबंधित स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंचाने से उपचार की गति में भी सुधार होगा।
सरकार का दृष्टिकोण और उद्देश्य
सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि पीएम राहत योजना सरकार की उस दृष्टि का प्रतीक है, जिसमें कमजोर और जरूरतमंद नागरिकों के लिए सेवा, करुणा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि योजना से न केवल हादसे के पीड़ितों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि यह सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया को व्यवस्थित बनाने में भी मदद करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क हादसों में बचाव और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा में तेजी लाने के लिए यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इससे अस्पतालों में समय पर पहुंच, तेज़ उपचार और कैशलेस सुविधा मिलना संभव होगा। इसके अलावा, यह योजना उन परिवारों के लिए भी राहत साबित होगी, जो किसी दुर्घटना के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर सकते हैं।
योजना का भविष्य
मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में पीएम राहत योजना को और व्यापक बनाने पर काम किया जाएगा। इसमें अधिक अस्पतालों को नेटवर्क में शामिल करना, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और प्रभावी बनाना और देशभर में जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस योजना की सफलता सीधे तौर पर हादसों के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और तेज़ इलाज पर निर्भर करेगी। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह योजना लाखों लोगों के जीवन को बचाने में मददगार साबित हो सकती है।