गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक सगाई समारोह उस समय विवाद में बदल गया, जब कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले दूल्हे की कथित प्रेमिका का फोन आ गया। एक फोन कॉल ने न सिर्फ रिश्ते की नींव हिला दी, बल्कि दोनों परिवारों के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति भी पैदा कर दी। अंततः मामला पुलिस तक पहुंचा और सगाई रद्द कर दी गई।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना गोरखपुर के पीपीगंज नगर स्थित एक मैरिज हाल की है। यहां गुलरिहा थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती की सगाई खजनी थाना क्षेत्र के सियर टोला निवासी सौरभ चौहान से तय थी। सौरभ चौहान डाक विभाग की गोरखपुर रेल मेल सेवा में कार्यरत बताया जा रहा है। दोनों परिवारों के बीच कई महीनों से शादी की तैयारियां चल रही थीं और सगाई समारोह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।
बताया जा रहा है कि समारोह स्थल पर लड़की पक्ष के लोग समय पर पहुंच गए थे, लेकिन लड़का मौके पर मौजूद नहीं था। जब लड़की के भाई ने सौरभ के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो फोन एक युवती ने उठाया। उसने खुद को सौरभ की प्रेमिका बताते हुए दावा किया कि दोनों के बीच पिछले छह वर्षों से संबंध हैं। इतना ही नहीं, युवती ने फोन पर यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान वह गर्भवती भी हुई थी और उसका गर्भपात कराया गया।
इस खुलासे के बाद समारोह स्थल पर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। लड़की पक्ष के लोग आक्रोशित हो उठे और लड़के के परिवार से जवाब मांगने लगे। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ती चली गई। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को शांत कराया और थाने ले जाकर बातचीत कराई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया और किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। सगाई को वहीं रद्द कर दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर विवाह से पहले पारदर्शिता और आपसी विश्वास की अहमियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवारों द्वारा तय रिश्तों में यदि अतीत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें छुपाई जाती हैं, तो ऐसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं, जो न केवल दो परिवारों के बीच संबंधों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी असहज स्थिति पैदा कर देते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत मिलती है, तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोरखपुर की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण फैसले में पारदर्शिता और ईमानदारी सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि एक छुपी हुई सच्चाई कई जिंदगियों को प्रभावित कर सकती है।