जेल से बाहर आते ही पप्पू यादव का बड़ा आरोप: “मेरी गिरफ्तारी के पीछे गहरी साजिश”, 31 साल पुराने मामले में जमानत के बाद सियासी हलचल तेज

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Javed Haider Zaidi

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बेऊर जेल से रिहा होने के बाद मीडिया से बात करते पूर्णिया सांसद पप्पू यादव

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) Rajesh Ranjan शुक्रवार को पटना की बेऊर जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को “बड़ी साजिश” बताते हुए कहा कि वे इस पूरे मामले में उच्च अधिकारियों से संपर्क करेंगे और सच्चाई सामने लाएंगे। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक फिजा एक बार फिर गरमा गई है।

जेल से बाहर आते ही क्या बोले पप्पू यादव?

बेऊर जेल से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा, “मेरी गिरफ्तारी के पीछे एक गहरी साजिश थी। मैं कानून का सम्मान करता हूं और आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन करूंगा, लेकिन जिस तरह से मुझे गिरफ्तार किया गया, वह सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस मामले में उच्च स्तर पर बात करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्हें एक के बाद एक कई मामलों में अदालत से राहत मिली है।

किन मामलों में मिली जमानत?

बताया जा रहा है कि पप्पू यादव को 31 साल पुराने जालसाजी मामले में स्पेशल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा गिरफ्तारी के दौरान हंगामा करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज एक अन्य मामले में भी उन्हें जमानत मिल गई है।

पटना और पूर्णिया में सड़क पर प्रदर्शन से जुड़े दो पुराने मामलों में भी अदालत ने उन्हें राहत दी है। इन सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

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क्या है 31 साल पुराना मामला?

मामला साल 1995 का बताया जाता है। पप्पू यादव पर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के तहत दस्तावेजों में जालसाजी का आरोप दर्ज हुआ था। आरोप था कि जिस मकान में वे किराए पर रहते थे, वहां उन्होंने पार्टी का कार्यालय खोल लिया था। मकान मालिक की शिकायत पर केस दर्ज हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अदालत की ओर से लंबे समय से वारंट जारी किया जा रहा था। दावा यह भी है कि वे कई वर्षों तक अदालत में पेश नहीं हुए। हालांकि पप्पू यादव की ओर से कहा गया था कि उन्हें समन की जानकारी है और वे कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

गिरफ्तारी को लेकर क्या था विवाद?

पप्पू यादव को 7 फरवरी की मध्यरात्रि पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के तरीके को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। पप्पू यादव ने आरोप लगाया था कि कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

उन्होंने यह भी कहा था कि वे संसद सत्र में भाग लेकर लौटे थे और अदालत में पेश होने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया। उनके समर्थकों ने भी गिरफ्तारी को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

कांग्रेस नेताओं ने जताई थी आपत्ति

पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी थी। दोनों नेताओं ने गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। इससे यह मामला केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया।

आगे क्या होगा?

अब जब पप्पू यादव को जमानत मिल चुकी है और वे जेल से बाहर आ गए हैं, तो अगला चरण कानूनी प्रक्रिया का होगा। वे अदालत में पेश होकर अपने पक्ष को मजबूती से रखने की बात कह रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। पूर्णिया सीट से निर्दलीय सांसद होने के बावजूद पप्पू यादव का अपना जनाधार है और वे अक्सर राज्य सरकार की नीतियों पर खुलकर टिप्पणी करते रहे हैं।

राजनीतिक और कानूनी मोड़ पर खड़ा मामला

यह मामला केवल एक पुराने केस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गिरफ्तारी की टाइमिंग, राजनीतिक बयानबाजी और अदालत की प्रक्रिया—सभी पहलू जुड़े हुए हैं। एक ओर पप्पू यादव इसे साजिश बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कानून अपनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अदालत में इस केस की सुनवाई किस दिशा में जाती है और पप्पू यादव अपने राजनीतिक सफर को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल उनकी रिहाई के बाद समर्थकों में उत्साह है, जबकि विरोधी खेमे की नजर अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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