बस ड्राइवर के बेटे ने कर दिखाया कमाल, चौथे प्रयास में बने IAS
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के एक छोटे से गांव से निकले मोइन अहमद ने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है। सीमित संसाधनों और लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार साल 2022 में UPSC परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 296 हासिल की।
उनकी यह कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो सिविल सेवा का सपना देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से घबराते हैं।
साधारण परिवार से असाधारण उपलब्धि तक का सफर
मोइन अहमद मुरादाबाद के दिलारी क्षेत्र के जटपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता वली हसन उत्तर प्रदेश रोडवेज में कॉन्ट्रैक्ट बस ड्राइवर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। पांच भाई-बहनों वाले परिवार में मोइन दूसरे नंबर पर आते हैं।
ऐसे माहौल में पढ़ाई जारी रखना ही एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन मोइन ने बचपन से ही ठान लिया था कि उन्हें बड़ा अधिकारी बनना है। उनका सपना था कि वह UPSC पास करके IAS अफसर बनें और अपने परिवार की स्थिति बदलें।
महंगी कोचिंग नहीं, खुद पर भरोसा किया
UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए अक्सर महंगी कोचिंग और बेहतर संसाधनों की जरूरत होती है। लेकिन मोइन के पास इतने साधन नहीं थे। उन्होंने परिस्थितियों को बहाना नहीं बनाया, बल्कि खुद पर भरोसा किया।
उन्होंने सेल्फ-स्टडी को अपना हथियार बनाया। किताबों, नोट्स और पुराने प्रश्नपत्रों के जरिए तैयारी शुरू की।
तीन बार प्रीलिम्स में असफल, फिर भी नहीं टूटा हौसला
मोइन की राह आसान नहीं थी। उन्होंने UPSC परीक्षा दी, लेकिन लगातार तीन बार वह प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सके।
किसी भी अभ्यर्थी के लिए यह सबसे कठिन दौर होता है। लगातार असफलता से आत्मविश्वास डगमगा सकता है। लेकिन मोइन ने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया।
उन्होंने अपनी रणनीति बदली, पढ़ाई का तरीका सुधारा और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया।
साइबर कैफे में नौकरी, दिन में काम, रात में पढ़ाई
आर्थिक परेशानियों के कारण मोइन दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने एक साइबर कैफे में नौकरी शुरू की ताकि अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च खुद उठा सकें।
दिनभर काम करने के बाद भी वह रोज 7 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे। थकान के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
यह दौर उनके जीवन का सबसे संघर्षपूर्ण समय था, लेकिन यही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
चौथे प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता
लगातार मेहनत और धैर्य का फल आखिरकार साल 2022 में मिला। मोइन अहमद ने चौथे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 296 हासिल की।
यह सिर्फ एक रैंक नहीं थी, बल्कि वर्षों के संघर्ष, त्याग और विश्वास की जीत थी।
युवाओं के लिए क्या है सीख?
मोइन अहमद की कहानी कई महत्वपूर्ण संदेश देती है:
- असफलता अंत नहीं, सुधार का अवसर है।
- आर्थिक तंगी सपनों को रोक नहीं सकती।
- सही रणनीति और निरंतर मेहनत सफलता की कुंजी है।
- धैर्य और आत्मविश्वास सबसे बड़ा संसाधन है।