पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत: 25 वर्षीय नर्स ने तोड़ा दम, जानें कितना घातक है यह जानलेवा संक्रमण

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Javed Haider Zaidi

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पश्चिम बंगाल के बारासात स्थित निजी अस्पताल में निपाह वायरस संक्रमण के बाद 25 वर्षीय नर्स की मौत के मामले में अस्पताल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट में जांच करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कोलकाता/बारासात। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से 25 वर्षीय एक महिला नर्स की मौत ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत इस नर्स का लंबे समय से इलाज चल रहा था। राज्य के हाल के इतिहास में निपाह वायरस से यह पहली दर्ज मौत मानी जा रही है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, नर्स की हालत पिछले कई दिनों से गंभीर बनी हुई थी। उन्हें क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में रखा गया था और बाद में वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट करना पड़ा। हालांकि हालिया टेस्ट रिपोर्ट में संक्रमण निगेटिव बताया गया था, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई। बुधवार को उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई और शाम करीब 4 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

यह घटना केवल एक चिकित्सा मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के जोखिम और वायरस की गंभीरता की भी एक बड़ी याद दिलाती है।

दो स्वास्थ्यकर्मी पहले भी हुए थे संक्रमित

जानकारी के मुताबिक, इसी अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के दो सदस्य पहले निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए थे। उनमें से एक पुरुष नर्स जनवरी में उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गए थे। लेकिन महिला नर्स की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और उन्हें अस्पताल में भर्ती ही रखना पड़ा।

निपाह वायरस की खास बात यह है कि यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों—जैसे लार, खून या श्वसन स्राव—के निकट संपर्क से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। हालांकि यह कोविड-19 की तरह अत्यधिक संक्रामक नहीं माना जाता, लेकिन अस्पतालों और परिवारों के भीतर इसका फैलाव तेजी से हो सकता है यदि सावधानी न बरती जाए।

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जानवरों से इंसानों में कैसे पहुंचता है निपाह वायरस?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। चमगादड़ों के लार, पेशाब या मल से संक्रमित फल या खजूर का रस इसके संक्रमण का प्रमुख माध्यम हो सकते हैं।

इसके अलावा सूअरों के जरिए भी यह वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रमित जानवरों या मनुष्यों के निकट संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों—जैसे मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड—में पहले भी निपाह के प्रकोप दर्ज किए जा चुके हैं, जिसके बाद एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी व्यवस्था सख्त की गई थी।

लक्षण कब और कैसे दिखते हैं?

निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 21 दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं—

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • खांसी और गले में खराश

लेकिन कुछ ही दिनों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। मरीज को निमोनिया या दिमाग की सूजन (एन्सेफलाइटिस) हो सकती है। दिमाग पर असर पड़ने से दौरे पड़ना, व्यवहार में बदलाव, भ्रम की स्थिति, कोमा और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण सामने आते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर मामलों में मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक दर्ज की गई है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।

निपाह वायरस इतना घातक क्यों?

निपाह वायरस का सबसे बड़ा खतरा इसका न्यूरोलॉजिकल असर है। यह सीधे दिमाग को प्रभावित करता है। कई मामलों में मरीज कुछ ही दिनों में कोमा में चला जाता है। जो मरीज ठीक भी हो जाते हैं, उनमें लंबे समय बाद दोबारा लक्षण उभरने की संभावना बनी रहती है।

इस संक्रमण के लिए अभी तक कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में विकसित की जा रही एक प्रयोगात्मक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (m102.4) पर ट्रायल जारी है, जिससे भविष्य में उम्मीदें जुड़ी हैं, लेकिन फिलहाल यह आम उपयोग में उपलब्ध नहीं है।

इलाज और बचाव: क्या हैं विकल्प?

निपाह वायरस का इलाज मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर पर आधारित है। इसमें शामिल हैं:

  • मरीज को तरल पदार्थ देना
  • ऑक्सीजन सपोर्ट
  • वेंटिलेटर की सहायता
  • दौरे रोकने की दवाएं

कुछ एंटीवायरल दवाओं—जैसे रिबाविरिन और रेमडेसिविर—पर ट्रायल किए गए हैं, लेकिन इनके परिणाम मिश्रित रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए:

  • चमगादड़ों के संपर्क में आए फलों या खजूर के रस का सेवन न करें
  • कच्चे या खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर मास्क और दस्ताने का उपयोग करें
  • अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों को तुरंत आइसोलेट किया जाए
  • हाथों की नियमित सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी

पश्चिम बंगाल में इस पहली दर्ज मौत ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल को और सख्त करने की जरूरत है।

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, समय पर जांच, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन व्यवस्था ही इस वायरस को फैलने से रोकने के मुख्य उपाय हैं।

25 वर्षीय नर्स की मौत एक व्यक्तिगत त्रासदी ही नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी भी है। निपाह वायरस भले ही आम संक्रमण की तरह तेजी से न फैलता हो, लेकिन इसका असर गहरा और जानलेवा हो सकता है। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और वैज्ञानिक तैयारी ही इससे लड़ने का सबसे मजबूत हथियार है।

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पीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन, सीएम योगी ने लिया तैयारियों का जायजा

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नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे

नोएडा में बने नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को हवाई अड्डे का निरीक्षण किया और उद्घाटन समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हवाई अड्डे का उद्घाटन 28 मार्च को करेंगे, जिससे नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के लिए हवाई यातायात में नई गति आने की संभावना है।

जेवर स्थित हवाई अड्डे का दौरा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से गाजियाबाद के हिंडन हवाई अड्डे पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के माध्यम से जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। लगभग डेढ़ घंटे तक चली बैठक में अधिकारियों ने उद्घाटन समारोह की रूपरेखा, सुरक्षा योजना, जनसभा के लिए संभावित संख्या, बैठने की व्यवस्था और अन्य तैयारियों की जानकारी दी।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां

सीएम योगी ने हवाई अड्डे और जनसभा स्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार और विशेष सचिव ईशान प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, चिकित्सा सुविधा, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

पार्किंग और जनसभा व्यवस्थाओं पर ध्यान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसभा स्थल पर पार्किंग व्यवस्था सुव्यवस्थित रूप से बनाई जाए। इसके अलावा, सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का समुचित इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस अवसर पर गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉक्टर महेश शर्मा, प्रभारी मंत्री कुंवर बृजेश सिंह, जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह, पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेघा रूपम, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के CEO राकेश कुमार सिंह, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड के CEO क्रिस्टोफ श्रेलमैन और COO किरण जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन से न केवल प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए हवाई यात्रा और वाणिज्यिक अवसरों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई अड्डे के शुरू होने से व्यापार, पर्यटन और रोजमर्रा की यातायात सुविधा में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलेगा।

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